
चर्चा में क्यों?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की सहकारी समितियों (Co-operative Societies) के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। सरकार ने अधिसूचित ‘नेशनल को-ऑपरेटिव फेडरेशन’ (राष्ट्रीय सहकारी महासंघों) द्वारा प्राप्त होने वाली डिविडेंड (लाभांश) आय पर तीन साल तक के लिए इनकम टैक्स (Income Tax) छूट देने का ऐलान किया है।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights & Facts)
1. तीन साल की टैक्स छूट (3-Year Tax Exemption):
किसी भी अधिसूचित ‘नेशनल को-ऑपरेटिव फेडरेशन’ को कंपनियों में किए गए उनके निवेश पर मिलने वाले डिविडेंड (Dividend) पर अगले 3 वर्षों तक पूरी तरह से टैक्स छूट दी जाएगी।
कटऑफ डेट: यह छूट विशेष रूप से उन निवेशों (Investments) पर लागू होगी जो 31 जनवरी, 2026 तक किए गए हैं।
छूट की मुख्य शर्त: फेडरेशन को यह टैक्स छूट तभी मिलेगी जब वह प्राप्त डिविडेंड की राशि को अपने पास रखने के बजाय, आगे अपनी सदस्य को-ऑपरेटिव समितियों (Member Co-operatives) के बीच वितरित (Distribute) करेगा।
2. नई टैक्स रिजीम में इंटर-कोऑपरेटिव डिविडेंड पर डिडक्शन:
पुरानी टैक्स व्यवस्था में एक को-ऑपरेटिव द्वारा दूसरी को-ऑपरेटिव सोसायटी से प्राप्त डिविडेंड आय पर टैक्स में कटौती (Deduction) मिलती थी।
अब सरकार ने इस डिडक्शन को ‘नई टैक्स रिजीम’ (New Tax Regime) के तहत भी लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इससे समितियों को ‘डबल टैक्सेशन’ (दोहरे कराधान) की समस्या से मुक्ति मिलेगी और उनके पास सदस्यों को बांटने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा।
3. पशु आहार (Cattle Feed) और कॉटन सीड (बिनौला) को भी राहत:
वर्तमान में, दूध, तिलहन, फल या सब्जियों की सप्लाई करने वाली प्राइमरी (प्राथमिक) को-ऑपरेटिव सोसायटीज को ही उनके मुनाफे पर डिडक्शन का लाभ मिलता था।
वित्त मंत्री ने इस दायरे का विस्तार करते हुए, अब सदस्यों द्वारा उत्पादित ‘पशु आहार’ (Cattle Feed) और ‘बिनौला’ (Cotton Seed) की सप्लाई से होने वाले मुनाफे को भी इस टैक्स छूट के अंतर्गत शामिल कर लिया है।
4. इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं:
हालांकि डिविडेंड पर राहत दी गई है, लेकिन को-ऑपरेटिव सोसायटीज के लिए मूल आयकर दरों (Income Tax Rates) को पहले जैसा ही (अपरिवर्तित) रखा गया है:
₹10,000 तक की आय पर: 10%
₹10,001 से ₹20,000 तक की आय पर: 20%
₹20,000 से अधिक की आय पर: 30%
5. अर्थव्यवस्था और संस्थाओं पर प्रभाव:
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से फेडरेटेड को-ऑपरेटिव्स की बैलेंस शीट मजबूत होगी, बाजार में कैपिटल सर्कुलेशन (पूंजी प्रवाह) में सुधार होगा और वे अपनी सदस्य संस्थाओं में ज्यादा पूंजी री-इन्वेस्ट (पुनर्निवेश) कर सकेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: नेशनल को-ऑपरेटिव फेडरेशन को डिविडेंड इनकम पर कितने साल तक की टैक्स छूट मिलेगी?
उत्तर: सरकार ने ऐसी लाभांश (Dividend) आय पर तीन साल की अवधि के लिए आयकर से छूट देने का ऐलान किया है।
प्रश्न 2: यह 3 साल की टैक्स छूट किन शर्तों पर दी जाएगी?
उत्तर: यह छूट केवल 31 जनवरी 2026 तक कंपनियों में किए गए निवेश पर मिलेगी और वह भी तब, जब फेडरेशन इस लाभांश को अपनी सदस्य को-ऑपरेटिव समितियों में आगे बांट देगा।
प्रश्न 3: बजट 2026 में किन नए कृषि उत्पादों को टैक्स डिडक्शन के दायरे में लाया गया है?
उत्तर: पहले से मौजूद दूध, फल और सब्जियों के अलावा अब प्राथमिक समितियों द्वारा बेचे जाने वाले ‘पशु आहार’ (Cattle feed) और ‘बिनौला’ (Cotton seed) के मुनाफे को भी टैक्स डिडक्शन के दायरे में शामिल किया गया है।
प्रश्न 4: नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में को-ऑपरेटिव्स के लिए क्या बदलाव हुआ है?
उत्तर: अब नई टैक्स रिजीम अपनाने वाली को-ऑपरेटिव सोसायटीज को भी ‘इंटर-कोऑपरेटिव डिविडेंड’ (एक समिति से दूसरी समिति को मिलने वाला लाभांश) पर टैक्स में छूट मिलेगी, जिससे डबल टैक्सेशन नहीं होगा।
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