
चर्चा में क्यों?
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने आज (16 मार्च 2026) नई दिल्ली में ‘प्रतिस्पर्धा कानून के अर्थशास्त्र’ पर 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है।
प्रमुख बिंदु
इस सम्मेलन का उद्घाटन नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा द्वारा किया गया।
श्री गौबा ने अपने संबोधन में कहा कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नवाचार (innovation), कार्यकुशलता और उपभोक्ताओं के लिए बेहतर विकल्पों का सबसे बड़ा आधार है।
उन्होंने जोर दिया कि प्रतिस्पर्धा कानून बाजार में निष्पक्षता बनाए रखता है, जिससे देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) के साथ जुड़ने में मदद मिलती है।
यह कानून सुनिश्चित करता है कि बड़े खिलाड़ियों के बीच छोटे व्यवसायों को भी आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें और बाजार में किसी का एकाधिकार न हो।
इस सम्मेलन का आयोजन प्रतिस्पर्धा कानून के आर्थिक पहलुओं का विश्लेषण करने और इसे आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया गया है।
परिचय और स्थापना: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है। इसकी स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी और यह पूर्ण रूप से मई 2009 में क्रियाशील हुआ।
उद्देश्य: * बाज़ार में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली प्रथाओं को रोकना।
बाज़ार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और उसे बनाए रखना।
उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना।
बाज़ार में अन्य प्रतिभागियों द्वारा किए जाने वाले व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।
संरचना: इसमें एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
प्रमुख कार्य:
एकाधिकार रोकना: बड़ी कंपनियों द्वारा अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग (Abuse of Dominant Position) करने पर रोक लगाना।
विलय और अधिग्रहण का विनियमन: कंपनियों के बीच होने वाले बड़े समझौतों (Mergers & Acquisitions) की जांच करना ताकि बाज़ार में एकाधिकार न बने।
जुर्माना लगाना: बाज़ार नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाना (जैसे हाल के वर्षों में गूगल और अन्य बड़ी टेक कंपनियों पर लगाया गया)।
चुनौतियां (2026): वर्तमान में आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल मार्केट और ई-कॉमर्स कंपनियों की एल्गोरिदम-आधारित कार्यप्रणाली है, जो कभी-कभी छोटे व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुँचाती है।
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