
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्कूली पाठ्यक्रम में न्यायपालिका की छवि को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
स्वत: संज्ञान (Suo Motu): सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा-8 की नई NCERT पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के भीतर ‘भ्रष्टाचार’ के उल्लेख पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बताया है।
विशेष पीठ का गठन: इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही है।
संविधान की मूल संरचना पर चोट: न्यायमूर्ति बागची ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों को इस तरह की सामग्री पढ़ाना संविधान की मूल संरचना (Basic Structure of Constitution) के सिद्धांतों के विरुद्ध प्रतीत होता है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की चिंता: वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि इतनी कम उम्र के बच्चों के मन में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा करना भविष्य के लिए घातक है।
विवादित सामग्री: NCERT की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका की चुनौतियों के रूप में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का बोझ और न्यायाधीशों की कमी को एक साथ सूचीबद्ध किया गया है, जिस पर न्यायालय ने कड़ी आपत्ति जताई है।
कठोर संदेश: मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न तो बार एसोसिएशन और न ही पीठ इस तरह से न्यायपालिका को बदनाम करने के प्रयास को बर्दाश्त करेगी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी इस विषयवस्तु से आहत हैं।
WATCH NOW – AEDO LATEST VIDEO
DOWNLOAD OUR APP – CLICK HERE
READ ALSO – भारत की ‘बायो-इकोनॉमी’ को नई उड़ान
(Supreme Court takes a strong view of the mention of ‘corruption’ in NCERT’s Class 8 textbook.)
