अमरावती में पोट्टी श्रीरामुलु की 58 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण (58-foot tall statue of Potti Sriramulu unveiled in Amaravati)

58-foot tall statue of Potti Sriramulu unveiled in Amaravati

चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू आज अमरावती में तेलुगु गौरव के प्रतीक और ‘अमरजीवी’ के रूप में विख्यात पोट्टी श्रीरामुलु की 58 फुट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे। यह प्रतिमा राज्य की सांस्कृतिक पहचान और उनके ऐतिहासिक बलिदान को समर्पित है।

प्रमुख बिंदु
यह प्रतिमा पूरी तरह से कांस्य (Bronze) से बनी है और इसकी ऊंचाई 58 फुट है। इसे अमरावती के एक प्रमुख चौराहे पर स्थापित किया गया है ताकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सके।

उन्हें ‘भाषाई आधार’ पर अलग आंध्र राज्य की मांग के लिए 58 दिनों तक आमरण अनशन करने और अपने प्राणों की आहुति देने के लिए याद किया जाता है। उनके इसी बलिदान के कारण 1953 में आंध्र राज्य का गठन हुआ था।

आमरण अनशन (1952): मद्रास प्रेसीडेंसी से अलग ‘आंध्र राज्य’ की मांग को लेकर पोट्टी श्रीरामुलु ने 19 अक्टूबर 1952 को मद्रास में अनशन शुरू किया था।

लगातार 58 दिनों तक अन्न-जल त्यागने के बाद 15 दिसंबर 1952 को उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद पूरे आंध्र क्षेत्र में व्यापक जन-आंदोलन और हिंसा भड़क उठी थी।

आंध्र राज्य का गठन (1953): उनके बलिदान के दबाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अलग आंध्र राज्य की घोषणा की। 1 अक्टूबर 1953 को भाषाई आधार पर बनने वाला आंध्र प्रदेश भारत का पहला राज्य बना।

राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC): इस घटना ने देश भर में भाषाई आधार पर राज्यों की मांग को तेज कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप 1953 में ‘फज़ल अली आयोग’ का गठन हुआ और बाद में राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित किया गया।

अमरजीवी की उपाधि: उनके अदम्य साहस और बलिदान के कारण ही उन्हें ‘अमरजीवी’ (वह जो हमेशा जीवित रहे) के नाम से जाना जाता है।

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(58-foot tall statue of Potti Sriramulu unveiled in Amaravati)

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