प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): देरी पर मिलेगा 12% ब्याज (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY): 12% interest will be given on delay)

Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY): 12% interest will be given on delay

चर्चा में क्यों?
कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में घोषणा की है कि सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े सुधार किए हैं। अब बीमा कंपनियों या राज्य सरकार की ओर से देरी होने पर किसानों को ब्याज सहित मुआवजा दिया जाएगा।

प्रमुख बिंदु
विलंब पर जुर्माना: यदि बीमा कंपनियाँ किसानों के दावों (Claims) का निपटारा 21 दिनों के भीतर नहीं करती हैं, तो उन्हें किसानों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।

राज्य सरकारों की जवाबदेही: यदि दावों के भुगतान में देरी राज्य सरकारों की लापरवाही या उनके हिस्से का प्रीमियम जमा न करने के कारण होती है, तो राज्य सरकारों को भी 12% ब्याज देना होगा।

शिकायत निवारण: किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए ‘कृषि रक्षक पोर्टल’ और हेल्पलाइन नंबर शुरू किया गया है। अब तक इस पोर्टल पर 2.71 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।

सख्त कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वाली और दावों को अटकाने वाली बीमा कंपनियों के खिलाफ सरकार ने सख्त कार्रवाई करने और उन्हें काली सूची (Blacklist) में डालने की चेतावनी दी है।

पारदर्शिता और डिजिटलीकरण: फसल कटाई के प्रयोगों और नुकसान के आकलन के लिए अब तकनीक और मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा रहा है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार कम हो।

योजना की शुरुआत: इस योजना का शुभारंभ 18 फरवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। यह पुरानी ‘राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना’ (NAIS) और ‘संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना’ (MNAIS) को मिलाकर बनाई गई थी।

प्रीमियम की दरें: किसानों के लिए प्रीमियम का बोझ बहुत कम रखा गया है:

खरीफ फसल: 2%

रबी फसल: 1.5%

बागवानी और वाणिज्यिक फसलें: 5%

कवरेज का दायरा: यह योजना बुवाई से पहले से लेकर कटाई के बाद के नुकसान तक को कवर करती है। इसमें सूखा, बाढ़, जलभराव, कीटों के हमले, ओलावृष्टि और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं।

तकनीकी उपयोग: पारदर्शी मूल्यांकन के लिए ‘डिजी-क्लेम’ (Digi-Claim) मॉड्यूल का उपयोग किया जाता है, जिससे दावों का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में (DBT के माध्यम से) किया जाता है।

स्वैच्छिक भागीदारी: 2020 से इस योजना को सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक (Voluntary) बना दिया गया है। यानी अब किसान अपनी इच्छा से इस बीमा को चुन सकते हैं।

कृषि रक्षक पोर्टल: हाल ही में सरकार ने शिकायतों के समाधान के लिए ‘कृषि रक्षक पोर्टल’ और हेल्पलाइन नंबर (14447) शुरू किया है।

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