विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की ब्रुसेल्स यात्रा का समापन (External Affairs Minister Dr. S. Jaishankar concludes his visit to Brussels)

External Affairs Minister Dr. S. Jaishankar concludes his visit to Brussels

चर्चा में क्यों?
भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने अपनी ब्रुसेल्स (बेल्जियम) की महत्वपूर्ण राजनयिक यात्रा संपन्न कर ली है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना था।

प्रमुख बिंदु
यात्रा के दौरान डॉ. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेन और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास से उच्च स्तरीय वार्ता की।

मुक्त व्यापार समझौता (FTA): बैठक का मुख्य केंद्र भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता रहा। विदेश मंत्री ने कहा कि यह समझौता न केवल आर्थिक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा।

दोनों पक्षों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को अधिक लचीला बनाने और व्यापार एवं निवेश प्रोत्साहन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा की।

साझा हित: इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे साझा हितों के मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

व्यापार में भारी वृद्धि: इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों पक्षों के बीच आयात और निर्यात पर लगने वाले शुल्क (Duties) को कम करना या समाप्त करना है। इससे भारतीय उत्पादों की पहुंच यूरोपीय बाजारों में आसान और सस्ती हो जाएगी।

इन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ: भारत के कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), रत्न एवं आभूषण (Gems and Jewellery) और हस्तशिल्प उद्योगों को इस समझौते से सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है, क्योंकि वर्तमान में इन पर उच्च आयात शुल्क लगता है।

विदेशी निवेश (FDI) में बढ़ोतरी: FTA के लागू होने से यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना अधिक सुरक्षित और आकर्षक हो जाएगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में सुधार: भारत और यूरोपीय संघ मिलकर एक ऐसी भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना चाहते हैं जो किसी एक देश (विशेषकर चीन) पर निर्भर न हो।

चुनौतियां और संवाद: डेयरी उत्पादों, ऑटोमोबाइल पर आयात शुल्क और डिजिटल व्यापार नियमों जैसे कुछ संवेदनशील मुद्दों पर अभी भी चर्चा जारी है। साथ ही, श्रम मानकों और पर्यावरणीय नियमों पर भी दोनों पक्ष सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

आर्थिक महत्व: यूरोपीय संघ भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।

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