सौर विनिर्माण को बढ़ावा: स्वीकृत सूची में इनगॉट्स और वेफर्स शामिल (Boost to solar manufacturing: Ingots and wafers included in the approved list)

Boost to solar manufacturing: Ingots and wafers included in the approved list

चर्चा में क्यों?
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने देश में सौर ऊर्जा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को मजबूती देने के लिए मॉडलों और विनिर्माताओं की स्वीकृत सूची (ALMM) में सौर इनगॉट्स (Ingots) और वेफर्स (Wafers) को शामिल करने का निर्णय लिया है।

प्रमुख बिंदु
महत्वपूर्ण बदलाव: मंत्रालय ने सोलर इनगॉट्स और वेफर्स के लिए मॉडलों और विनिर्माताओं की तीसरी स्वीकृत सूची जारी की है। यह कदम भारत को सौर घटकों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया है।

अनिवार्यता की तिथि: यह नया नियम 1 जून 2028 से प्रभावी होगा। इस तारीख के बाद से सभी सौर परियोजनाओं के लिए इस सूची में शामिल वेफर्स का उपयोग करना अनिवार्य हो जाएगा।

आयात पर निर्भरता कम करना: वर्तमान में भारत सौर वेफर्स और इनगॉट्स के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। इस नीति से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) मजबूत होगी और विदेशों पर निर्भरता कम होगी।

मंत्री का वक्तव्य: केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इसे देश के सौर विनिर्माण तंत्र के लिए एक “निर्णायक कदम” बताया है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।

लक्ष्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक सौर विनिर्माण का केंद्र बनाना और 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से बिजली पैदा करने के लक्ष्य को गति देना है।

सोलर इनगॉट्स (Silicon Ingots): यह सौर पैनल बनाने की प्रक्रिया का पहला ठोस चरण है। शुद्ध सिलिकॉन को बहुत उच्च तापमान पर पिघलाकर बड़े बेलनाकार या वर्गाकार ब्लॉकों में ढाला जाता है, जिन्हें ‘इनगॉट्स’ कहते हैं।

सोलर वेफर्स (Silicon Wafers): जब इनगॉट्स तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें बहुत पतली परतों या स्लाइस में काटा जाता है। इन पतली स्लाइस को ही ‘वेफर्स’ कहा जाता है। एक वेफर की मोटाई कागज के समान बहुत कम होती है।

सोलर सेल का निर्माण: इन्हीं वेफर्स पर विशेष रसायनों की कोटिंग और सर्किट बनाकर उन्हें ‘सोलर सेल’ में बदला जाता है। जब कई सोलर सेल्स को एक साथ जोड़ा जाता है, तो एक ‘सोलर पैनल’ बनता है।

भारत के लिए महत्व: वर्तमान में भारत सोलर पैनल तो असेंबल (Assemble) करता है, लेकिन उनके अंदर लगने वाले वेफर्स और इनगॉट्स के लिए आयात पर निर्भर है। सरकार के इस फैसले से देश में ही इनका बड़े स्तर पर निर्माण शुरू होगा।

आत्मनिर्भरता: 1 जून 2028 से परियोजनाओं में केवल स्वीकृत सूची वाले वेफर्स का उपयोग अनिवार्य होने से भारतीय कंपनियों को अपने प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

भारत सरकार ने अपने ‘नेट जीरो’ (Net Zero) लक्ष्य और 2030 तक 500 गीगावाट (GW) गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लिए सौर नीति में कई बड़े बदलाव किए हैं। बजट 2026-27 में सौर परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन बढ़ाकर ₹30,000 करोड़ से अधिक कर दिया गया है।

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