ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर हमला: रेडियोधर्मी रिसाव की कोई रिपोर्ट नहीं (Iran’s Natanz nuclear facility attacked: No reports of radioactive leak)

Iran's Natanz nuclear facility attacked: No reports of radioactive leak

चर्चा में क्यों?
ईरान के सबसे महत्वपूर्ण परमाणु संवर्धन केंद्र नतांज (Natanz) पर 21 मार्च 2026 को हुए एक बड़े हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। यह हमला पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चौथे सप्ताह में हुआ है, जिससे क्षेत्र में परमाणु सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रमुख बिंदु
21 मार्च 2026 की सुबह ईरान के नतांज स्थित यूरेनियम संवर्धन परिसर को अमेरिका और इजरायल द्वारा एक संयुक्त हमले में निशाना बनाया गया।

ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हमले में संयंत्र की इमारतों को नुकसान पहुँचा है, लेकिन किसी भी प्रकार का रेडियोधर्मी रिसाव (Radioactive leakage) दर्ज नहीं किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी स्पष्ट किया है कि साइट पर विकिरण (Radiation) के स्तर में कोई असामान्य वृद्धि नहीं देखी गई है और आसपास के निवासी सुरक्षित हैं।

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से सैन्य संयम बरतने की अपील की है ताकि किसी भी बड़ी परमाणु दुर्घटना से बचा जा सके।

हमले के जवाब में ईरान ने इजरायल के डिमोना (Dimona) और अराद (Arad) शहरों पर मिसाइलें दागी हैं, जहाँ इजरायल का परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थित है।

रूस ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया है।

उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के अनुसार, हमले में संवर्धन संयंत्र के प्रवेश द्वारों और कुछ प्रशासनिक इमारतों को महत्वपूर्ण नुकसान पहुँचा है।

रेडियोधर्मी रिसाव तब होता है जब यूरेनियम या प्लूटोनियम जैसे परमाणु पदार्थ अनियंत्रित होकर हवा, पानी या मिट्टी में मिल जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने परमाणु घटनाओं की गंभीरता को मापने के लिए 0 से 7 तक का ‘आईएनईएस स्केल’ (INES Scale) बनाया है।

इस स्केल पर लेवल 0 सामान्य विचलन को दर्शाता है, जबकि लेवल 7 सबसे बड़ी परमाणु आपदा (जैसे चेरनोबिल) को दर्शाता है।

मानव शरीर पर रेडिएशन के प्रभाव या डोज को ‘सीवर्ट’ (Sievert) इकाई में मापा जाता है।

सामान्य जनता के लिए रेडिएशन की सुरक्षित सीमा प्रति वर्ष 1 मिली-सीवर्ट (1 mSv) निर्धारित की गई है।

परमाणु संयंत्रों में काम करने वाले विकिरण कर्मियों (Radiation Workers) के लिए यह सीमा प्रति वर्ष औसतन 20 मिली-सीवर्ट होती है।

भारत में सभी परमाणु गतिविधियों की निगरानी और सुरक्षा ‘परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड’ (AERB) द्वारा की जाती है।

भारत में रेडिएशन सुरक्षा के लिए ‘परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962’ और ‘विकिरण संरक्षण नियम 2004’ जैसे सख्त कानून लागू हैं।

किसी भी रिसाव की स्थिति में ‘परमाणु दुर्घटना की शीघ्र अधिसूचना के सम्मेलन’ के तहत संबंधित देश को तुरंत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचित करना अनिवार्य है।

रेडिएशन के अधिक संपर्क में आने से कैंसर, आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Genetic Mutations) और त्वचा के जलने जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

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