
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी बॉम्बे में ‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया के लिए ‘स्केलेबल’ और ‘किफायती’ समाधान विकसित करने वाला ग्लोबल हब बन चुका है।
🇫🇷 मिशन ‘Nice 2026’ की तैयारी
यह प्री-समिट 2026 में फ्रांस के नीस (Nice) में आयोजित होने वाले ‘भारत इनोवेट्स 2026’ की पूर्वपीठिका है। इसका उद्देश्य भारतीय अनुसंधान और विकास (R&D) आधारित नवाचारों को वैश्विक मंच पर ले जाना है।
💡 समिट की प्रमुख बातें और उपलब्धियां
व्यापक भागीदारी: देश भर से प्राप्त 1,186 आवेदनों में से 137 डीप-टेक स्टार्टअप्स को इस प्रदर्शनी के लिए चुना गया।
निवेशक और शिक्षा जगत का संगम: मंत्री ने 175 निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ राउंड-टेबल चर्चा की।
प्रमुख क्षेत्र: नवाचारों का प्रदर्शन मुख्य रूप से ऊर्जा, जलवायु स्थिरता, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बायोटेक और उन्नत कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में किया गया।
🎯 विजन: प्रयोगशाला से बाजार तक (Lab to Market)
शिक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विचारों को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ‘मार्केट-रेडी’ समाधानों में बदलना चाहिए।
सतत निवेश: उभरते उद्यमों को बड़े पैमाने पर स्केल करने के लिए निरंतर निवेश की आवश्यकता है।
ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: भारत के पास ऐसे समाधान विकसित करने की क्षमता है जो न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के लिए भी मददगार होंगे।
इंडस्ट्री-एकेडेमिया पार्टनरशिप: शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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