
चर्चा में क्यों?
हाल ही में (24 मार्च 2026), गुजरात विधानसभा में 7 घंटे से अधिक की लंबी और मैराथन बहस के बाद ‘गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026’ बहुमत से पारित हो गया है। इसी के साथ गुजरात, उत्तराखंड (फरवरी 2024) के बाद UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights & Facts)
1. समान कानूनी ढांचा (Uniform Legal Framework):
इस बिल का मुख्य उद्देश्य राज्य में धर्म, जाति या समुदाय की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार (Inheritance) और गोद लेने (Adoption) जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए एक समान और धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा तैयार करना है।
2. विवाह और तलाक के बेहद सख्त नियम:
अनिवार्य पंजीकरण: राज्य में शादी का पंजीकरण 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा न करने पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
बहुविवाह पर रोक: बहुविवाह (Polygamy/Bigamy) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। अगर किसी व्यक्ति का जीवनसाथी जीवित है, तो उसकी दूसरी शादी वैध नहीं मानी जाएगी।
सज़ा का प्रावधान: जबरन, धोखे से, या दबाव डालकर की गई शादी के मामलों में 7 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।
तलाक के नियम: ‘हलाला’ जैसी प्रथाओं और अदालत के बाहर (Extra-judicial) होने वाले तलाक के सभी रूपों पर कड़ी रोक लगा दी गई है।
3. लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationships) पर बड़ा फैसला:
गुजरात में अब सभी लिव-इन रिश्तों का पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य होगा।
अगर कोई जोड़ा पंजीकरण नहीं कराता है, तो उन्हें 3 महीने तक की जेल या ₹10,000 का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
युवाओं के लिए खास नियम: यदि लिव-इन में रहने वाले जोड़े की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है, तो उनके लिव-इन रिलेशनशिप की जानकारी अनिवार्य रूप से उनके माता-पिता (Parents) को दी जाएगी।
ऐसे रिश्तों से पैदा होने वाले बच्चों को पूरी कानूनी मान्यता मिलेगी और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में पूरा अधिकार (Inheritance Rights) मिलेगा।
4. कानून का ड्राफ्ट और पृष्ठभूमि:
इस बिल का विस्तृत मसौदा सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (Justice Ranjana Prakash Desai) की अध्यक्षता वाली एक उच्च-स्तरीय समिति द्वारा तैयार किया गया था, जिन्होंने पूरे राज्य में व्यापक जन-परामर्श (Public Consultations) के बाद यह रिपोर्ट सौंपी थी।
5. महिलाओं के अधिकारों की रक्षा:
यह कानून महिलाओं के कल्याण पर विशेष ध्यान देता है। यह बिना किसी शर्त तलाक के बाद दोबारा शादी करने का अधिकार देता है और बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर समान हिस्सा (Equal Inheritance) सुनिश्चित करता है।
6. किसे दी गई है छूट? (Exemptions):
भारत के संविधान द्वारा संरक्षित अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes – STs) और कुछ विशिष्ट समूहों को इस UCC कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि उनके पारंपरिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा हो सके।
7. विपक्ष का कड़ा विरोध:
विधानसभा में विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस बिल का भारी विरोध किया। उन्होंने इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और इसे समीक्षा के लिए ‘सेलेक्ट कमेटी’ (Select Committee) के पास भेजने की मांग की थी, जिसे नामंजूर कर दिया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला पहला और दूसरा राज्य कौन सा है?
उत्तर: फरवरी 2024 में UCC लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य था, जिसके बाद 24 मार्च 2026 को बिल पास करके गुजरात ऐसा करने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
प्रश्न 2: गुजरात UCC बिल 2026 के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के लिए क्या नियम हैं?
उत्तर: सभी लिव-इन रिश्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। ऐसा न करने पर 3 महीने की जेल या ₹10,000 का जुर्माना हो सकता है। 18 से 21 साल की उम्र के मामले में माता-पिता को सूचित किया जाएगा।
प्रश्न 3: इस बिल के तहत किस समुदाय को पूरी तरह से छूट दी गई है?
उत्तर: संविधान के अनुच्छेद के तहत संरक्षित ‘अनुसूचित जनजातियों (STs)’ को इस समान नागरिक संहिता के प्रावधानों से पूरी तरह छूट दी गई है।
प्रश्न 4: गुजरात UCC बिल का मसौदा (Draft) किस समिति ने तैयार किया था?
उत्तर: इस ऐतिहासिक बिल का मसौदा सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश ‘जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई’ की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तैयार किया गया था।
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