
चर्चा में क्यों?
भारत को वैश्विक चुंबक निर्माण हब (Magnet Manufacturing Hub) बनाने के उद्देश्य से भारी उद्योग मंत्रालय ने 7 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण ‘प्री-बिड कॉन्फ्रेंस’ (Pre-bid Conference) आयोजित की। यह बैठक केंद्र सरकार की ₹7,280 करोड़ वाली ‘रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ (REPM) निर्माण योजना को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें देश-विदेश की लगभग 25 प्रमुख कंपनियों ने हिस्सा लिया।
प्रमुख बिंदु:
भारत सरकार ने देश में ‘सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन’ (NdFeB) चुंबक के उत्पादन के लिए ₹7,280 करोड़ की वित्तीय योजना को मंजूरी दी है।
इस योजना का मुख्य लक्ष्य भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन (MTPA) एकीकृत चुंबक निर्माण क्षमता विकसित करना है।
योजना के तहत सरकार चुंबक की बिक्री पर ₹6,450 करोड़ का ‘सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव’ और इकाइयां स्थापित करने के लिए ₹750 करोड़ की ‘कैपिटल सब्सिडी’ प्रदान करेगी।
चयनित कंपनियों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ‘आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड’ (IREL India Ltd) के माध्यम से कच्चे माल की सुनिश्चित आपूर्ति का प्रावधान किया गया है।
बजट 2026-27 के अनुसार, ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ‘समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर’ (Dedicated Rare Earth Corridors) विकसित किए जाएंगे।
यह पहल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरणों, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चीन जैसे देशों पर आयात निर्भरता को कम करेगी।
सरकार इस योजना के माध्यम से कच्चे रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार चुंबक तक की पूरी ‘वैल्यू चेन’ भारत में ही स्थापित करना चाहती है।
इस योजना के लिए वैश्विक बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई 2026 निर्धारित की गई है।
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% रेयर अर्थ मैग्नेट आयात करता है, जिसे यह योजना पूरी तरह बदलने का लक्ष्य रखती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):
NdFeB मैग्नेट: यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली स्थायी चुंबक है, जो नियोडिमियम, आयरन और बोरॉन के मिश्रण से बनता है।
रेयर अर्थ तत्व (REE): आवर्त सारणी (Periodic Table) के 17 रासायनिक तत्वों के समूह को ‘दुर्लभ मृदा तत्व’ कहा जाता है, जो आधुनिक तकनीक के लिए अनिवार्य हैं।
IREL (India) Limited: यह परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन एक मिनी-रत्न कंपनी है, जो भारत में रेयर अर्थ खनिजों के खनन और पृथक्करण का कार्य करती है।
AMD (परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय): भारत में रेयर अर्थ ऑक्साइड (REO) के संसाधनों का अनुमान लगाने वाली प्राथमिक संस्था।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
1. भारत सरकार की रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) योजना का कुल बजट कितना है?
इस महत्वाकांक्षी योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹7,280 करोड़ निर्धारित किया गया है।
2. इस योजना के तहत प्रति वर्ष कितने उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है?
सरकार ने भारत में सालाना 6,000 मीट्रिक टन (MTPA) एकीकृत चुंबक निर्माण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
3. हाल ही में प्री-बिड कॉन्फ्रेंस का आयोजन कहाँ और कब किया गया?
भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन 7 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में किया गया।
4. किन राज्यों में ‘समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर’ विकसित किए जा रहे हैं?
बजट 2026-27 के तहत ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ये कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
5. रेयर अर्थ मैग्नेट का उपयोग किन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाता है?
इनका उपयोग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स, विंड टर्बाइन, स्मार्टफोन, मिसाइल गाइडिंग सिस्टम और एयरोस्पेस में होता है।
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