
चर्चा में क्यों?
भारत ने अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में एक नया ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56.12 गीगावाट (GW) को पार कर गई है। यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में 15% की शानदार वृद्धि को दर्शाती है, जो भारत के ‘ग्रीन एनर्जी’ ट्रांजिशन में एक बड़ी छलांग है।
प्रमुख बिंदु:
गुजरात 13.5 गीगावाट की स्थापित क्षमता के साथ देश में पहले स्थान पर है, जबकि तमिलनाडु दूसरे स्थान पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इस क्षेत्र ने लगभग 12 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आकर्षित किया है, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।
भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
यह लक्ष्य भारत के उस व्यापक संकल्प का हिस्सा है जिसके तहत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता विकसित करनी है।
हाल ही में गुजरात और तमिलनाडु के समुद्री तटों पर देश के पहले 1 गीगावाट के ‘ऑफशोर विंड’ (अपतटीय पवन) प्रोजेक्ट के लिए वैश्विक टेंडर जारी किए गए हैं।
सरकार ‘जेनरेशन बेस्ड इंसेंटिव’ (GBI) और ‘रिन्यूएबल एनर्जी बंडलिंग’ जैसी प्रभावी नीतियों के माध्यम से पवन ऊर्जा क्षेत्र को लगातार प्रोत्साहन दे रही है।
कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्य भी नई तकनीकों और सौर-पवन हाइब्रिड मॉडल के जरिए उत्पादन में तेजी से वृद्धि कर रहे हैं।
बजट 2026-27 में ‘ऑफशोर विंड’ के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) के विशेष प्रावधानों ने इस क्षेत्र की विकास दर को नई गति दी है।
वर्तमान में भारत अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 11% हिस्सा अकेले पवन ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त कर रहा है।
भारत अब पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता के मामले में चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):
NIWE (राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान): यह संस्थान तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित है और पवन ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए जिम्मेदार है।
वैश्विक पवन दिवस (Global Wind Day): दुनिया भर में पवन ऊर्जा की क्षमता को पहचानने के लिए हर साल 15 जून को मनाया जाता है।
COP26 प्रतिबद्धता: भारत ने 2070 तक ‘नेट जीरो’ (Net Zero) उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, जिसमें पवन ऊर्जा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
MNRE (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय): भारत में अक्षय ऊर्जा नीतियों को लागू करने वाला नोडल मंत्रालय है (वर्तमान मंत्री: प्रह्लाद जोशी, )।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
1. अप्रैल 2026 तक भारत की कुल पवन ऊर्जा क्षमता कितनी हो गई है?
भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56.12 गीगावाट (GW) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
2. पवन ऊर्जा उत्पादन के मामले में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है?
भारत वर्तमान में दुनिया का चौथा (4th) सबसे बड़ा पवन ऊर्जा उत्पादक देश है।
3. भारत का कौन सा राज्य पवन ऊर्जा क्षमता में शीर्ष पर है?
वर्तमान में गुजरात भारत का शीर्ष पवन ऊर्जा उत्पादक राज्य है, उसके बाद तमिलनाडु का स्थान आता है।
4. भारत ने वर्ष 2030 तक कितनी पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है?
भारत ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
5. ‘ऑफशोर विंड’ प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार ने बजट 2026-27 में क्या विशेष घोषणा की है?
सरकार ने अपतटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind) परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) के माध्यम से वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है।
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