
चर्चा में क्यों?
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की शुरुआती स्टेज में ही पहचान (Early Detection) करने और इसके इलाज को अधिक सुलभ बनाने के लिए भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेज कर दिया है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने अपने महत्वाकांक्षी ‘India AI Mission’ के तहत “कैंसर AI एंड टेक्नोलॉजी चैलेंज (CATCH)” नामक एक नए कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य देश के दूरदराज के क्षेत्रों में भी कैंसर की सटीक और त्वरित (fast) जांच सुनिश्चित करना है।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights & Facts)
1. ‘CATCH’ कार्यक्रम और इसका उद्देश्य:
‘कैंसर AI एंड टेक्नोलॉजी चैलेंज (CATCH)’ का मुख्य लक्ष्य देश के बड़े अस्पतालों और टेक्नोलॉजी कंपनियों (Tech Startups) को एक मंच पर लाना है।
सरकार इन्हें मिलकर ऐसे AI-आधारित कैंसर स्क्रीनिंग और जांच समाधान (Diagnostic Solutions) विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जो सस्ते, सटीक और भारत की भौगोलिक स्थिति के अनुकूल हों।
2. स्टार्टअप्स और कंपनियों के लिए भारी फंडिंग (Financial Support):
इस चैलेंज के तहत जो परियोजनाएं (Projects) बेहतरीन और असरदार पाई जाएंगी, उन्हें सरकार की ओर से ₹50 लाख तक की शुरुआती (Seed) फंडिंग दी जाएगी।
यदि मॉडल सफल रहता है और उसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाना है, तो यह वित्तीय सहायता बढ़ाकर ₹1 करोड़ तक कर दी जाएगी।
3. ABDM के तहत ‘सैंडबॉक्स’ (Sandbox) प्लेटफॉर्म की शुरुआत:
हेल्थ टेक डेवलपर्स की सुविधा के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत एक विशेष ‘सैंडबॉक्स’ प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है।
यहाँ डेवलपर्स अपने द्वारा बनाए गए नए ‘AI आधारित हेल्थ टूल्स’ की सुरक्षित रूप से टेस्टिंग कर सकते हैं और उन्हें सरकारी सिस्टम के साथ इंटीग्रेट (जोड़) कर सकते हैं।
4. राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग पोर्टल (NCD Portal) का आधुनिकीकरण:
कैंसर सहित अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की डिजिटल स्क्रीनिंग, जांच और इलाज की पूरी प्रक्रिया को अब NCD पोर्टल से सीधे जोड़ दिया गया है।
इस आधुनिक वेब और मोबाइल ऐप के माध्यम से देश की लाखों आशा (ASHA) और एएनएम (ANM) कार्यकर्ता मरीजों का डेटा आसानी से दर्ज कर सकेंगी और उनकी रीयल-टाइम निगरानी कर सकेंगी।
5. ABHA से सीधा लिंक (Digital Health Record):
यह पूरी AI और डिजिटल व्यवस्था सीधे मरीज के ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) से जुड़ी होगी।
इससे मरीज की कैंसर रिपोर्ट, पिछली दवाइयां और पूरा हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल रूप में एक ही जगह सुरक्षित रहेगा, जिससे डॉक्टरों को इलाज करने में आसानी होगी और कागजी झंझट खत्म होगा।
6. भविष्य का प्रभाव (Impact):
विशेषज्ञों के अनुसार, AI टूल इंसानी आंखों से भी ज्यादा बारीकी से एक्स-रे या एमआरआई (MRI) पढ़ सकते हैं। इससे 5 मिमी जितने छोटे ट्यूमर की भी पहचान शुरुआती स्टेज (Stage 1) में हो जाएगी, जिससे कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में भारी कमी आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: कैंसर स्क्रीनिंग के लिए सरकार ने हाल ही में कौन सा नया कार्यक्रम शुरू किया है?
उत्तर: सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के ‘India AI Mission’ के तहत “कैंसर AI एंड टेक्नोलॉजी चैलेंज (CATCH)” कार्यक्रम शुरू किया है।
प्रश्न 2: CATCH योजना के तहत चयनित AI प्रोजेक्ट्स को कितनी फंडिंग मिलेगी?
उत्तर: चयनित परियोजनाओं को शुरुआत में ₹50 लाख की फंडिंग मिलेगी, जिसे प्रोजेक्ट की सफलता के आधार पर ₹1 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है।
प्रश्न 3: ABDM के तहत ‘सैंडबॉक्स’ (Sandbox) क्या है?
उत्तर: यह एक डिजिटल टेस्टिंग प्लेटफॉर्म है जहाँ टेक कंपनियां और डेवलपर्स अपने नए ‘AI-आधारित हेल्थकेयर टूल्स’ का सुरक्षित तरीके से परीक्षण (Test) कर सकते हैं।
प्रश्न 4: जमीनी स्तर पर कैंसर का डेटा इकट्ठा करने के लिए किस पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है?
उत्तर: आशा (ASHA) और एएनएम (ANM) कार्यकर्ताओं द्वारा मरीजों की डिजिटल स्क्रीनिंग और डेटा दर्ज करने के लिए ‘राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग पोर्टल (NCD Portal)’ का उपयोग किया जा रहा है, जो मरीजों के ABHA अकाउंट से जुड़ा है।
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