
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाने के लिए एक नई पहल की है। अब मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को दूरदर्शन और आकाशवाणी पर अपना प्रचार करने के लिए डिजिटल टाइम वाउचर जारी किए गए हैं।
🏛️ कानूनी आधार और कवरेज
अधिनियम: यह व्यवस्था लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 39ए के तहत लागू की गई है।
लक्षित क्षेत्र: आगामी विधानसभा चुनावों के लिए असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में इसे प्रभावी बनाया गया है।
प्लेटफॉर्म: सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों को एक विशेष IT प्लेटफॉर्म के माध्यम से ये वाउचर उपलब्ध कराए गए हैं।
⏳ समय आवंटन की गणित
चुनाव आयोग ने समय का बंटवारा निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए दो भागों में किया है:
आधार समय (Base Time): प्रत्येक पात्र पार्टी को दूरदर्शन और आकाशवाणी दोनों पर 45-45 मिनट का न्यूनतम समय मुफ्त दिया जाएगा।
अतिरिक्त समय (Performance Based): पार्टियों को उनके पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन (वोट शेयर/सीटें) के आधार पर अतिरिक्त समय आवंटित किया गया है।
निर्धारण प्रक्रिया: वास्तविक समय का स्लॉट मुख्य चुनाव अधिकारी की उपस्थिति में लॉटरी के माध्यम से तय किया जाता है।
📝 प्रसारण के कड़े नियम और मानक
प्रसारण की गुणवत्ता और मर्यादा बनाए रखने के लिए कुछ शर्तें अनिवार्य हैं:
समय सीमा: उम्मीदवारों की सूची जारी होने से लेकर मतदान से 48 घंटे पहले तक ही प्रसारण किया जा सकेगा।
तकनीकी मानक: रिकॉर्डिंग प्रसार भारती के स्टूडियो या उनके द्वारा निर्धारित मानकों वाले केंद्रों में ही करनी होगी।
पूर्व-अनुमोदन: पार्टियों को प्रसारण से पहले अपनी लिखित सामग्री और रिकॉर्डिंग जमा करनी होगी।
🗣️ संवाद के लिए विशेष मंच
केवल एकतरफा भाषण ही नहीं, बल्कि आयोग ने चर्चाओं के लिए भी स्थान सुरक्षित किया है:
पैनल चर्चा: प्रसार भारती द्वारा दो विशेष पैनल चर्चाएं या बहस आयोजित की जाएंगी।
समान प्रतिनिधित्व: प्रत्येक पात्र दल अपना एक प्रतिनिधि इन चर्चाओं में भेज सकेगा, जिसका संचालन एक स्वतंत्र समन्वयक करेगा।
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