
चर्चा में क्यों?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) का नोटिस लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को सौंप दिया है। इस नोटिस पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
प्रमुख बिंदु
महाभियोग शुरू करने के लिए लोकसभा के न्यूनतम 100 और राज्यसभा के 50 सांसदों की आवश्यकता होती है, जबकि टीएमसी के नोटिस पर इससे कहीं अधिक सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
प्रमुख आरोप: 10 पन्नों के इस नोटिस में पद से हटाने के 7 मुख्य कारण बताए गए हैं, जिनमें बिहार की एसआईआर (SIR) प्रक्रिया, वोटिंग अधिकारों का हनन और कुछ राजनीतिक दलों के प्रति पक्षपात के आरोप शामिल हैं।
प्रक्रिया का अगला चरण: लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के पास अब 14 दिन का समय है। यदि नोटिस सही पाया जाता है, तो आरोपों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा।
जांच समिति: यह समिति तय करेगी कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का ठोस मामला बनता है या नहीं। यदि मामला बनता है, तो सदन में इस पर चर्चा होगी।
बचाव का अधिकार: प्रक्रिया के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त को अपना पक्ष रखने या वकील रखने का पूरा अधिकार होगा।
समयसीमा: यह पूरी प्रक्रिया बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद संपन्न होने की संभावना है।
संवैधानिक आधार: संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
हटाने के आधार: उन्हें केवल दो आधारों पर हटाया जा सकता है: ‘सिद्ध कदाचार’ (Proven Misbehavior) या ‘अक्षमता’ (Incapacity)。
सदन में शुरुआत:
लोकसभा: नोटिस पर कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए。
राज्यसभा: नोटिस पर कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए。
अध्यक्ष/सभापति की भूमिका: सदन के अध्यक्ष (Speaker) या सभापति नोटिस को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। यदि वे इसे स्वीकार करते हैं, तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाता है。
जांच समिति की संरचना: इस समिति में एक सुप्रीम कोर्ट के जज, एक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता (Jurist) शामिल होते हैं。
सदन में मतदान (विशेष बहुमत): यदि समिति दोषी पाती है, तो प्रस्ताव को सदन में लाया जाता है। इसे पारित करने के लिए:
सदन की कुल सदस्यता का बहुमत।
सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत आवश्यक है।
अंतिम चरण: दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद, इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जिनके आदेश के बाद ही मुख्य चुनाव आयुक्त को पदमुक्त किया जा सकता है।
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(Impeachment of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar)
