
भारत ने वैश्विक डेयरी उद्योग में अपनी बादशाहत कायम रखते हुए एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि वह ‘विश्व की दूध की कटोरी’ है। पशुधन और कृषि के संगम ने देश को इस ऐतिहासिक शिखर पर पहुँचाया है।
इस उपलब्धि के मुख्य सांख्यिकीय और महत्वपूर्ण बिंदु:
दुनिया में हिस्सेदारी: वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल दुग्ध उत्पादन में अकेले भारत का योगदान 25% है। इसका अर्थ है कि दुनिया का हर चौथा गिलास दूध भारत से आता है।
उत्पादन का नया रिकॉर्ड: वर्ष 2024-25 के दौरान देश में दुग्ध उत्पादन का आंकड़ा 24 करोड़ 70 लाख टन के पार पहुँच गया है, जो भारतीय किसानों की कड़ी मेहनत का परिणाम है।
अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार: भारत की कृषि प्रगति अब केवल फसलों तक सीमित नहीं है। पशुधन, डेयरी, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा और पोषण: दुग्ध उत्पादन में यह निरंतर वृद्धि न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि देश की पोषण सुरक्षा (Nutritional Security) को भी सुनिश्चित कर रही है।
सरकारी प्रोत्साहन: सरकार की विभिन्न योजनाओं और तकनीकी हस्तक्षेपों के कारण पशुपालन के क्षेत्र में उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है।
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(India is number one with 25% of the world’s milk production.)
