
विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर लद्दाख की बर्फीली वादियों और वहां के दुर्लभ जीवों को सुरक्षित रखने के लिए एक ऐतिहासिक साझेदारी हुई है। भारतीय सेना और लद्दाख के वन एवं पर्यावरण विभाग ने मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने का संकल्प लिया है।
दुर्लभ प्रजातियों पर पहरा: इस पहल का मुख्य केंद्र लद्दाख के ‘शान’ माने जाने वाले हिम तेंदुए (Snow Leopard), हिमालयी भेड़िये, भरल, आइबेक्स, मार्मोट और लुप्तप्राय काले गर्दन वाले सारस का संरक्षण करना है।
पारिस्थितिक संतुलन: लद्दाख का वातावरण अत्यंत संवेदनशील (Fragile Ecosystem) है। सेना और पर्यावरण विभाग मिलकर इन जीवों के प्राकृतिक आवासों (Habitats) को सुरक्षित बनाएंगे।
सतत विकास का लक्ष्य: रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सही संतुलन स्थापित करना है।
रणनीतिक सहयोग: भारतीय सेना न केवल सीमाओं की रक्षा करेगी, बल्कि अब लद्दाख की जैव विविधता के संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभाएगी।
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