एनआरसी रिपोर्ट: पाकिस्तानी हमलों के कारण 1.15 लाख से अधिक अफगानी बेघर (NRC report: Over 1.15 lakh Afghans rendered homeless due to Pakistani attacks)

NRC report: Over 1.15 lakh Afghans rendered homeless due to Pakistani attacks

चर्चा में क्यों?
अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता संगठन ‘नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल’ (NRC) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण अफगानिस्तान में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है, जिससे 1,15,000 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं।

प्रमुख बिंदु
एनआरसी की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 से कुनार और नंगरहार प्रांतों में शुरू हुए हमलों के कारण अफगान नागरिकों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है।

हमलों के कारण लगभग 800 घरों को पूरी तरह या आंशिक रूप से नुकसान पहुँचा है, जिससे हजारों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

16 मार्च 2026 को काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबर है, जिसे एनआरसी ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है।

बेघर हुए लोगों के पास भोजन, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जिससे मानवीय स्थिति और बिगड़ गई है।

एनआरसी के निदेशक जैकोपो कैरीडी ने चेतावनी दी है कि मानवीय सहायता के लिए वैश्विक फंडिंग में कमी ने विस्थापित लोगों के संकट को और बढ़ा दिया है।

अफगानिस्तान सरकार ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने डूरंड लाइन के पास संघर्ष विराम (Ceasefire) का उल्लंघन किया है और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया है।

डूरंड रेखा की स्थापना 12 नवंबर 1893 को ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच एक समझौते के माध्यम से हुई थी।

लंबाई: यह लगभग 2,670 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है जो वर्तमान में अफगानिस्तान और पाकिस्तान को एक-दूसरे से अलग करती है।

पश्तून विभाजन: इस रेखा ने पश्तून जातीय समूह को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया, जिससे उनके परिवार और जमीनें दो अलग-अलग देशों (अफगानिस्तान और पाकिस्तान) में बँट गईं।

अफगानिस्तान का रुख: अफगानिस्तान की कोई भी सरकार (चाहे वह तालिबान हो या पिछली लोकतांत्रिक सरकारें) इस रेखा को एक वैध अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में स्वीकार नहीं करती है।

पाकिस्तान का रुख: पाकिस्तान डूरंड रेखा को अपनी स्थायी और कानूनी अंतरराष्ट्रीय सरहद मानता है और घुसपैठ रोकने के लिए इस पर कँटीली बाड़ (Fencing) लगा रहा है।

1951 का शरणार्थी सम्मेलन: यह संयुक्त राष्ट्र की एक बहुपक्षीय संधि है जो ‘शरणार्थी’ शब्द को परिभाषित करती है और उनके अधिकारों व सदस्य देशों के दायित्वों को निर्धारित करती है।

1967 का प्रोटोकॉल: इस प्रोटोकॉल ने 1951 के सम्मेलन की समय और भौगोलिक सीमाओं को हटाकर इसे पूरी दुनिया के शरणार्थियों पर समान रूप से लागू कर दिया।

नॉन-रिफाउलमेंट (Non-Refoulement) का सिद्धांत: यह अंतरराष्ट्रीय कानून का सबसे बुनियादी नियम है, जो किसी भी देश को शरणार्थियों को जबरन ऐसे स्थान पर वापस भेजने से रोकता है जहाँ उनकी जान या आजादी को खतरा हो।

भारत की स्थिति: भारत ने अभी तक 1951 के शरणार्थी सम्मेलन या 1967 के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, फिर भी यहाँ बड़ी संख्या में शरणार्थियों को आश्रय दिया जाता है।

विदेशी अधिनियम (Foreigners Act): भारत में शरणार्थियों के लिए कोई अलग कानून नहीं है; उन्हें ‘विदेशी अधिनियम 1946’ और अब नए ‘इमिग्रेशन और विदेशी अधिनियम 2025’ के तहत ही विनियमित किया जाता है।

नया इमिग्रेशन अधिनियम 2025: यह नया कानून विदेशी अधिनियम 1946 की जगह लेता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर अवैध प्रवासियों के प्रवेश व प्रवास पर सख्त नियंत्रण और दंड का प्रावधान करता है।

संवैधानिक संरक्षण: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता) गैर-नागरिकों और शरणार्थियों पर भी लागू होता है, जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने विभिन्न फैसलों में स्पष्ट किया है।

UNHCR की भूमिका: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) उन देशों में शरणार्थियों के पंजीकरण और पहचान पत्र जारी करने में मदद करता है जहाँ राष्ट्रीय शरणार्थी कानून मौजूद नहीं हैं।

शरणार्थी बनाम प्रवासी: कानूनन शरणार्थी वे हैं जो अपनी जाति, धर्म या राजनीतिक विचारधारा के कारण उत्पीड़न के डर से भागते हैं, जबकि आर्थिक अवसरों के लिए देश छोड़ने वालों को प्रवासी माना जाता है।

WATCH NOW – AEDO LATEST VIDEO
DOWNLOAD OUR APP – CLICK HERE
READ ALSO – 2033 तक सभी नागरिकों को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा
(NRC report: Over 1.15 lakh Afghans rendered homeless due to Pakistani attacks)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *