गवर्नर जनरल द्वरा लागू नीतियां

गवर्नर जनरल एवं उनकी नीतियां गवर्नर जनरल नीति वर्ष वारेन हेस्टीगेन्स बंगाल दैवध शासन का अंत 1772  ई लॉर्ड कार्नवालिस स्थाई बन्दोंवस्त 1793 ई लॉर्ड वेल्जली सहायक संधी 1798 ई लॉर्ड ऑकलैंड अग्रगामी नीति 1842 ई लॉर्ड डलहौजी राज्य हड़प नीति 1848 ई सर जॉन लॉरेंस महँ निष्क्रियता 1864 ई लॉर्ड रिपन स्थानीय स्वशासन 1883 ई लॉर्ड कर्जन बंगाल विभाजन 1905 ई

यूरोपीय कंपनी एवं उनका भारत आगमन

यूरोपीय कंपनी एवं उनका भारत आगमन यूरोपीय कंपनियां स्थापना वर्ष      पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कंपनी 1498 ईस्वी डच ईस्ट इंडिया कंपनी 1602 ईस्वी फ़्रांसिसी ईस्ट इंडिया कंपनी 1664 ईस्वी अंगरेजी ईस्ट इंडिया कंपनी 1600  ईस्वी डैनिश ईस्ट इंडिया कंपनी 1616  ईस्वी स्वीडिश ईस्ट इंडिया कंपनी 1731 ईस्वी

मध्यकालीन भारत के महत्वपूर्ण तथ्य

मध्यकालीन प्रसिद्ध लोगों के उपनाम एवं उपाधी मूल नाम उपनाम/उपाधी श्रीहरी अकबरीयकालिदास अर्जुमंद बानो बेगम मलिका-ए-जमानी औरंगजेब दाराविश,जिन्दापीर अहमद शाह अब्दाली दुर्र-ए-दुर्राट आमिर खुसरो तूतिया-ए-हिन्द केशव दास काठीन  काव्य का प्रेत इल्तुतमिश नासिर आमिर हेमू विक्रमजीत सिकंदर लोदी गुलरुखी सलीमा बेगम मख़फ़ी खुर्रम शाहजहां फरीद शेरशाह मेहरूनिन्सा नूरजहां अली कुली खां शैबानी खान-ए-शमा दारा शिकोह शाहबुलंद इकबाल मुहम्मद गोरी मुईजुद्दीन अलउद्दीन खिजली दुतीय सिकंदर कुतुबुद्दीन ऐबक लाखबक्श मुहम्मद तुगलक Read More …

वीर शिवाजी

शिवा जी के अष्टप्रधान अष्टप्रधान कार्य पेशवा राज्य के प्रसासन एवं अर्थवयवस्था की देख रेख सर-ए-नौबत(सेनापती) सैनिकों की भर्ती ,संगठन , अनुसासन तथा युद्ध क्षेत्र में सेना की तैनाती अमात्य या मजूमदार सैनिकों की भर्ती ,संगठन , अनुसासन तथा युद्ध क्षेत्र में सेना की तैनाती Read More …

प्राचीन भारत के प्रमुख राजवंश

प्रमुख राजवंश राजवंश संस्थापक राजधानी हर्यकवंश बिम्बिसार राजगृह,पाटलिपुत्र शिशुनागवंश शिशुनाग पाटलिपुत्र नंदवंश महापदमनंद पाटलिपुत्र मौर्यवंश चंद्रगुप्तमौर्य पाटलिपुत्र शुंगवंश पुशयमित्र शुंग पाटलिपुत्र कण्ववंश वसुदेव पाटलिपुत्र सातवाहनवंश सिमुक प्रतिष्ठान इक्ष्वाकुवंश श्रीशांतमूल नागार्जुनीकोन्ड कुषाण वंश कडफिसस प्रथम पुरुषपुर (पेशावर ) मथुरा गुप्त वंश श्रीगुप्त पाटलिपुत्र हूण वंश तोरमाण शाकल  (स्यालकोट) वर्धन वंश नरवर्द्वन Read More …

सातवाहक वंश

सातवाहन शक्ति ने किसी न किसी रूप में लगभग 400 वर्षों तक शासन किया, जो प्राचीन भारत में किसी एक वंश का सबसे लंबा कार्यकाल है। सबसे शुरुआती सातवाहन शासक आंध्र प्रदेश में नहीं बल्कि उत्तरी महाराष्ट्र में थे, जहाँ Read More …

शुंग वंश

मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद, मगध की शक्ति सुंगों के हाथों में आ गई। इस राजवंश के संस्थापक, “पुष्यमित्र शुंग” थे। “पुष्यमित्र शुंग” ने 185 ई. पू. में अंतिम मौर्य शासक वृहद्रथ की हत्या कर दी थी। सुंग ब्राह्मण Read More …

पुष्यभूति वंश

वर्धन या पुष्यभूति वंश की राजनीतिक शक्ति छठी शताब्दी के उत्तरार्ध में और सातवीं शताब्दी के पूर्वार्ध्द में थानेश्वर (हरियाणा) में उत्पन्न हुई। इस राजवंश के संस्थापक “पुष्यभूति” और महान शासक हर्षवर्धन थे। ये संभवत: गुप्तों के सामंत या अधिकारी Read More …

कण्व वंश

कण्व वंश अंतिम सुंग शासक देवभूति की हत्या करने के बाद, उनके अधिकारी ‘वासुदेव’ ने कण्व वंश की नींव रखी। यह भी ब्राह्मण वंश का था। इसके केवल चार शासक हुए वासुदेव, भूमिमित्र, नारायण और सुशर्मन। 30 ईसा पूर्व में Read More …

बिन्दुसार (298 -273 ई. पू.)

बिन्दुसार मौर्य वंश का राजा था जो चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। बिन्दुसार को अमित्रघात, सिंहासन, भद्रासर और अजातशत्रु भी कहा गया है। बिन्दुसार महान मौर्य सम्राट अशोक के पिता थे। ग्रीक लेखकों ने इसे अमित्रचेटस या अमित्रघात कहा, जिसका Read More …

मुग़ल साम्राज्य

मुगल साम्राज्य भारत में मुगल वंश के सबसे महान शासकों में से एक था। मुगल शासकों ने हजारों लाखों लोगों पर शासन किया। मुगल शासन के दौरान यहां विभिन्न सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तन देखे गये। पूरे भारत में कई मुस्लिम Read More …

सल्तनत काल

प्रशासन दिल्ली सल्तनत एक केंद्रीकृत नौकरशाही प्रणाली पर आधारित थी, लेकिन प्रशासन का विनियमन सुल्तान की क्षमता पर निर्भर करता था। अलाउद्दीन, बलबन जैसे शासकों ने पूरी तरह से निरंकुश सत्ता का आनंद लिया, जबकि फिरोज तुगलक, नसरुद्दीन जैसे शासकों Read More …