
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने देश को ‘मैग्नेट मेजर’ (Magnet Major) बनाने के लिए ₹7,280 करोड़ की लागत वाली ‘रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ (REPM) निर्माण योजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। हाल ही में भारी उद्योग मंत्रालय ने इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाली निर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए वैश्विक निविदाएं आमंत्रित की हैं।
प्रमुख बिंदु:
केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना के लिए कुल 7,280 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी है।
इस योजना का मुख्य लक्ष्य भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन (MTPA) ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ के उत्पादन की क्षमता विकसित करना है।
सरकार इस योजना के तहत चुंबक की बिक्री पर 6,450 करोड़ रुपये का ‘सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव’ और इकाइयाँ लगाने के लिए 750 करोड़ रुपये की ‘कैपिटल सब्सिडी’ प्रदान करेगी।
यह योजना पूरी तरह से एकीकृत (Integrated) निर्माण सुविधाओं के निर्माण पर जोर देती है, जिसमें कच्चे माल (रेयर अर्थ ऑक्साइड) को धातु, मिश्र धातु और अंततः तैयार चुंबक में बदला जाएगा।
रेयर अर्थ मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), पवन ऊर्जा (Wind Energy), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरणों और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं।
वर्तमान में भारत अपनी मैग्नेट जरूरतों के लिए मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है, लेकिन इस पहल से घरेलू मांग का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही उत्पादित होने की उम्मीद है।
इस योजना की कुल अवधि 7 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए 2 वर्ष का समय और प्रोत्साहन वितरण के लिए 5 वर्ष का समय शामिल है।
सरकार ने हाल ही में ‘मृदा’ (IREL India Ltd) के माध्यम से चयनित बोलीदाताओं को कच्चे माल (NdPr ऑक्साइड) की सुनिश्चित आपूर्ति का भी प्रावधान किया है।
बजट 2026-27 में इस योजना को और मजबूती देने के लिए ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ‘डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर’ बनाने की घोषणा भी की गई है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):
रेयर अर्थ मैग्नेट (Rare Earth Magnets): ये स्थायी चुंबक होते हैं जो ‘दुर्लभ मृदा तत्वों’ (Rare Earth Elements) की मिश्र धातुओं से बने होते हैं। इनमें नियोडिमियम (Nd) और प्रासोडायमियम (Pr) सबसे प्रमुख हैं।
NdFeB मैग्नेट: यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली और व्यावसायिक रूप से उपयोग होने वाला रेयर अर्थ मैग्नेट है, जो नियोडिमियम, आयरन और बोरॉन से बना होता है।
IREL (India) Limited: यह परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, जो भारत में रेयर अर्थ खनिजों के खनन और पृथक्करण का कार्य करता है।
चीन का एकाधिकार: वर्तमान में दुनिया के कुल रेयर अर्थ उत्पादन और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग पर 90 प्रतिशत से अधिक नियंत्रण चीन का है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
1. भारत सरकार की मैग्नेट उत्पादन योजना का कुल बजट कितना है?
इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 7,280 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
2. इस योजना के तहत प्रति वर्ष कितने उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है?
सरकार ने प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन (MTPA) रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
3. रेयर अर्थ मैग्नेट मुख्य रूप से किन उद्योगों के लिए अनिवार्य हैं?
ये मैग्नेट मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मोटर्स, पवन टर्बाइन, स्मार्टफोन, मिसाइल गाइडिंग सिस्टम और चिकित्सा उपकरणों (MRI) के लिए अनिवार्य हैं।
4. हाल ही में किन राज्यों में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ बनाने की घोषणा की गई है?
बजट 2026-27 के अनुसार, ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विशेष रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
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