
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने रुड़की (उत्तराखंड) स्थित स्टार्टअप ‘इंडिजिनस एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड’ (IndiEnergy) को वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह मदद कृषि और जैविक कचरे से प्राप्त ‘हार्ड कार्बन’ का उपयोग करके सोडियम-आयन बैटरी के व्यावसायिक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दी गई है।
प्रमुख बिंदु:
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कृषि कचरे (जैसे मूंगफली के छिलके, नारियल के छिलके आदि) से ‘हार्ड कार्बन’ तैयार करना है।
यह हार्ड कार्बन सोडियम-आयन बैटरी में ‘एनोड’ (Anode) सामग्री के रूप में उपयोग किया जाता है, जो ऊर्जा भंडारण के लिए महत्वपूर्ण है।
सोडियम-आयन बैटरी वर्तमान में उपयोग होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों का एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प है।
सोडियम प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जबकि लिथियम के लिए भारत को पूरी तरह से आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
यह तकनीक ‘वेस्ट-टू-वैल्यू’ (कचरे से मूल्य निर्माण) के सिद्धांत पर आधारित है और पर्यावरण के अनुकूल है।
इन बैटरियों का उपयोग ई-रिक्शा, ई-स्कूटर, सोलर स्ट्रीट लाइट और ग्रिड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB): इसकी स्थापना वर्ष 1996 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत की गई थी। इसका मुख्य कार्य स्वदेशी तकनीक के विकास और उनके व्यावसायिक उपयोग के लिए वित्तीय सहायता देना है।
सोडियम-आयन बैटरी बनाम लिथियम-आयन: सोडियम-आयन बैटरी में चार्ज कैरियर के रूप में सोडियम आयनों का उपयोग होता है। ये लिथियम की तुलना में सस्ती होती हैं और अत्यधिक तापमान (गर्मी या ठंड) में अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं।
हार्ड कार्बन (Hard Carbon): यह कार्बन का वह रूप है जो बहुत उच्च तापमान पर भी ग्रेफाइट में नहीं बदलता। इसकी संरचना ऐसी होती है कि यह सोडियम के बड़े आयनों को आसानी से अपने भीतर समाहित कर लेती है, जिससे यह सोडियम बैटरियों के लिए सबसे उपयुक्त एनोड मटेरियल है।
लिथियम भंडार: वर्तमान में दुनिया में लिथियम का सबसे बड़ा भंडार ‘लिथियम ट्राएंगल’ (अर्जेंटीना, चिली और बोलीविया) में पाया जाता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
1. TDB ने किस कंपनी को सोडियम-आयन बैटरी तकनीक के लिए वित्तीय सहायता दी है?
TDB ने रुड़की स्थित ‘इंडिजिनस एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड’ (IndiEnergy) को सहायता प्रदान की है।
2. सोडियम-आयन बैटरी के लिए ‘हार्ड कार्बन’ किस चीज से बनाया जाएगा?
इसे कृषि और जैविक कचरे (जैसे नारियल के छिलके और अन्य जैव-भार) से तैयार किया जाएगा।
3. लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में सोडियम-आयन बैटरी क्यों बेहतर है?
सोडियम सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, जिससे बैटरी की लागत कम हो जाती है। साथ ही, यह लिथियम की तुलना में अधिक सुरक्षित और आग प्रतिरोधी है।
4. इन स्वदेशी बैटरियों का उपयोग कहाँ किया जा सकेगा?
इनका उपयोग ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक स्कूटर, इन्वर्टर, यूपीएस और सोलर लाइटिंग सिस्टम में किया जा सकेगा।
5. भारत के लिए यह तकनीक रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह तकनीक लिथियम और कोबाल्ट जैसे दुर्लभ खनिजों के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
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