
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिख धर्म के छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के ज्योति-जोत दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गुरु साहिब के उस अटूट साहस को याद किया जिसने सिख पंथ को आध्यात्मिक शक्ति के साथ-साथ आत्मरक्षा और न्याय के लिए लड़ने की शक्ति प्रदान की।
⚔️ ‘मीरी-पीरी’ और ‘संत-सिपाही’ परंपरा की नींव
गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने सिख धर्म में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया। उन्होंने महसूस किया कि धर्म की रक्षा के लिए केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि शस्त्र की शक्ति भी आवश्यक है।
दो तलवारें: उन्होंने ‘मीरी’ (सांसारिक/राजनीतिक सत्ता) और ‘पीरी’ (आध्यात्मिक गुरुता) की दो तलवारें धारण कीं।
संत-सिपाही: उन्होंने सिखों को ‘संत-सिपाही’ के रूप में तैयार किया—जो भक्ति में लीन हों लेकिन अन्याय के विरुद्ध शस्त्र उठाने में भी सक्षम हों।
🏛️ अकाल तख्त की स्थापना (1609)
गुरु साहिब ने अमृतसर में ‘अकाल तख्त’ (ईश्वर का सिंहासन) की स्थापना की।
यह सिखों के लिए आध्यात्मिक और सांसारिक (Temporal) सत्ता का सर्वोच्च केंद्र बना।
यहाँ से गुरु साहिब सैन्य प्रशिक्षण, न्याय और सामुदायिक मसलों पर निर्णय लेते थे।
🤝 एकता और करुणा का संदेश: ‘बंदी छोड़’
गृह मंत्री ने गुरु साहिब के उस महान कार्य को भी याद किया जब उन्होंने ग्वालियर के किले से 52 हिंदू राजाओं को मुगल कैद से मुक्त कराया था।
यह घटना ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।
यह कार्य हिंदू-सिख एकता, न्याय और मानवीय गरिमा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
📜 गुरु हरगोबिंद साहिब जी का संक्षिप्त जीवन-वृत्त
| विवरण | जानकारी |
| जन्म | 1595, पंजाब (गुरु अर्जन देव जी के पुत्र) |
| विशेष योगदान | अकाल तख्त की स्थापना, मीरी-पीरी सिद्धांत |
| सैन्य सुधार | सिखों को आत्मरक्षा के लिए संगठित और प्रशिक्षित किया |
| ज्योति-जोत | 1644 |
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(The originator of the ‘Saint-Soldier’ tradition and ‘Miri-Piri’)
