
असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी (ADBU) इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के साथ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में कदम रखने वाली उत्तर-पूर्व की पहली यूनिवर्सिटी बनने जा रही है। (North-East India’s first student-built satellite mission)
1. मिशन की पृष्ठभूमि और प्रेरणा
नामकरण: इस सैटेलाइट का नाम महान अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन के सम्मान में रखा गया है। यह नाम वीरता और रक्षा का प्रतीक है।
शुरुआत: इस प्रोजेक्ट की नींव 2022 में प्रोफेसर बिक्रमजीत काकती के नेतृत्व में रखी गई थी।
टीम: इसे पूरी तरह से यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा फैकल्टी के मार्गदर्शन में विकसित किया जा रहा है, जो ‘हैंड्स-ऑन’ लर्निंग का बेहतरीन उदाहरण है।
2. सैटेलाइट के मुख्य उद्देश्य (उपयोगिता)
‘लाचित-1’ को विशेष रूप से उत्तर-पूर्व भारत की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह निम्नलिखित क्षेत्रों में डेटा प्रदान करेगा:
आपदा प्रबंधन: यह क्षेत्र में होने वाले भूस्खलन (Landslides) और बाढ़ की सटीक निगरानी करेगा।
पर्यावरण और जलवायु: मौसम के बदलते पैटर्न और पर्यावरणीय बदलावों का अध्ययन करने में मदद मिलेगी।
डेटा विश्लेषण: सैटेलाइट से प्राप्त जानकारी का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान के लिए किया जाएगा।
3. इस मिशन का महत्व
यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक है: | क्षेत्र | प्रभाव | | :— | :— | | शैक्षिक क्रांति | उत्तर-पूर्व के छात्रों को अब अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। | | क्षेत्रीय सुरक्षा | बाढ़ और भूस्खलन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर डेटा उपलब्ध होगा। | | नवाचार (Innovation) | यह प्रोजेक्ट अन्य क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों को भी वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप्स के लिए प्रेरित करेगा। |
4. तकनीकी महत्व: पेलोड और डेटा
सैटेलाइट ‘लाचित-1’ संभवतः एक नैनो-सैटेलाइट या क्यूबसैट (CubeSat) श्रेणी का हिस्सा होगा, जिसे कम पृथ्वी की कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित किया जा सकता है। यह ग्राउंड स्टेशन को रीयल-टाइम इमेज और सेंसर डेटा भेजेगा, जिससे आपदाओं के समय त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे।
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