
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री, सर्बानंद सोनोवाल ने घोषणा की है कि संसद ने हाल ही में समाप्त हुए मानसून सत्र में पांच महत्वपूर्ण समुद्री बिल पास किए हैं। इन बिलों का उद्देश्य औपनिवेशिक काल के समुद्री कानूनों को बदलना और ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देना है।
👉 पास किए गए बिलों में ‘बिल्स ऑफ लेडिंग 2025’, ‘कैरिज ऑफ गुड्स बाय सी बिल 2025’, ‘कोस्टल शिपिंग बिल 2025’, ‘मर्चेंट शिपिंग बिल 2025’ और ‘इंडियन पोर्ट्स बिल 2025’ शामिल हैं।
👉 ‘बिल्स ऑफ लेडिंग 2025’ का मकसद कानूनी दस्तावेजों को सरल बनाना है, जिससे विवाद कम हों और व्यापार करने में आसानी हो।
👉 ‘कैरिज ऑफ गुड्स बाय सी बिल 2025’ ने 1925 के पुराने कानून की जगह ली है। इसमें मुकदमेबाजी को कम करने और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने के लिए हेग-विस्बी नियमों को अपनाया गया है।
👉 ‘कोस्टल शिपिंग बिल 2025’ का लक्ष्य भारत के 6% मोडल शेयर को पुनर्जीवित करना है, जिससे हर साल लॉजिस्टिक्स लागत में लगभग ₹10,000 करोड़ की बचत होगी, साथ ही प्रदूषण और सड़क की भीड़ भी कम होगी।
👉 ‘मर्चेंट शिपिंग बिल 2025’ ने 1958 के पुराने कानून में बदलाव किया है, जिससे जहाजों के मलबे को हटाने और बचाव कार्यों को तेजी से करने में मदद मिलेगी।
👉 ‘इंडियन पोर्ट्स बिल 2025’ ने 1908 के पुराने कानून की जगह ली है। इसके तहत बेहतर राष्ट्रीय योजना के लिए मैरीटाइम स्टेट डेवलपमेंट काउंसिल बनाई गई है, छोटे बंदरगाहों के प्रबंधन के लिए राज्य समुद्री बोर्डों को अधिक शक्ति दी गई है और राज्य स्तर पर विवादों को हल करने का एक तरीका स्थापित किया गया है।