
भारत अब आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स देशों के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाने वाले इस महत्वपूर्ण मंच का हिस्सा बन गया है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। (BCIC)
1. प्रमुख घोषणा और नेतृत्व
नोडल विभाग: इसकी घोषणा नई दिल्ली में उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा की गई।
संचालन: राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) को भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर ‘ब्रिक्स औद्योगिक दक्षता केंद्र’ के रूप में नामित किया गया है।
भूमिका: NPC भारत की सहभागिता का नेतृत्व करेगा और उद्योगों में उन्नत पद्धतियों को लागू करने का जिम्मा संभालेगा।
2. मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य
इस केंद्र के माध्यम से भारत और अन्य ब्रिक्स देशों में निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने की योजना है:
एकीकृत सहायता: विनिर्माण कंपनियों और MSMEs (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों) को एक ही छत के नीचे तकनीकी और रणनीतिक सहायता प्रदान करना।
क्षमता निर्माण: श्रमिकों और उद्यमियों के कौशल में सुधार करना ताकि वे आधुनिक मशीनों और तकनीकों का उपयोग कर सकें।
उत्पादकता वृद्धि: कम लागत और कम संसाधनों में अधिक और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना।
नवाचार और आधुनिकीकरण: ‘स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग’ और ‘इंडस्ट्री 4.0’ जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाना।
3. वैश्विक सहयोग: UNIDO की भूमिका
यह केंद्र केवल ब्रिक्स देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) के साथ साझेदारी में शुरू किया गया है।
इसका उद्देश्य ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच ही नहीं, बल्कि उससे बाहर भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और औद्योगिक नवाचार को बढ़ावा देना है।
4. भारत के लिए इसके लाभ
| क्षेत्र | होने वाला लाभ |
| MSME सेक्टर | छोटे उद्योगों को वैश्विक बाजार तक पहुँच और नई तकनीक मिलेगी। |
| तकनीकी ज्ञान | चीन, रूस और ब्राजील जैसे देशों की सफल औद्योगिक तकनीकों को साझा किया जा सकेगा। |
| मेक इन इंडिया | इस सहयोग से ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी। |
| मानक स्थापना | भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर होगी। |
