
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज़ की भारत यात्रा के दौरान इस ‘संयुक्त आशय घोषणा पत्र’ (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए, जो दोनों देशों के बीच तकनीकी विश्वास को दर्शाता है। (A new partnership for the digital future)
1. समझौते के मुख्य बिंदु
इस सहयोग के तहत दोनों देश निम्नलिखित क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करेंगे:
सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान: दूरसंचार नीतियों, सुरक्षा मानकों और तकनीकी विकास पर दोनों देश निरंतर संवाद करेंगे।
भविष्य की तकनीकें: उभरती हुई तकनीकों जैसे 5G एडवांस्ड और 6G के अनुसंधान और विकास (R&D) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सुरक्षित नेटवर्क: साइबर सुरक्षा और विश्वसनीय दूरसंचार बुनियादी ढांचे (Trusted Telecom Infrastructure) के निर्माण में सहयोग।
2. द्विपक्षीय संबंधों का महत्व
मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत-जर्मनी संबंधों में एक नया अध्याय है:
रणनीतिक साझेदारी: यह दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करेगा।
डिजिटल इंडिया को मजबूती: जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता से भारत के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान और स्वदेशी दूरसंचार समाधानों को लाभ मिलेगा।
3. प्रमुख क्षेत्रों पर प्रभाव
| क्षेत्र | अपेक्षित लाभ |
| अनुसंधान (R&D) | दोनों देशों के स्टार्टअप और शोधकर्ता मिलकर 6G मानकों पर काम कर सकेंगे। |
| मानक निर्धारण | वैश्विक दूरसंचार मानकों के निर्धारण में भारत और जर्मनी की एक साझा आवाज होगी। |
| औद्योगिक सहयोग | भारतीय और जर्मन कंपनियों के बीच सेमीकंडक्टर और संचार उपकरणों के निर्माण में साझेदारी बढ़ेगी। |
4. संदर्भ: चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज़ की यात्रा
यह घोषणा पत्र चांसलर की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान साइन किया गया, जो दर्शाता है कि जर्मनी अब एशिया में भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी साझेदार के रूप में देखता है।
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