
यह समझौता ज्ञापन (MoU) मुख्य रूप से भारत के ‘क्लियरिंग हाउस’ प्रणालियों को यूरोपीय मानकों के अनुरूप मान्यता दिलाने के लिए किया गया है।
1. समझौते का मुख्य उद्देश्य
औपचारिक मान्यता: इसका प्राथमिक लक्ष्य क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) और अन्य केंद्रीय प्रतिपक्षों (Central Counterparties – CCPs) को यूरोपीय संघ (EU) द्वारा आधिकारिक मान्यता दिलाना है।
बाजार स्थिरता: यह सुनिश्चित करना कि यूरोपीय बैंक (जैसे डॉयचे बैंक, बीएनपी पारिबा) भारतीय बॉन्ड और डेरिवेटिव बाजारों में बिना किसी विनियामक बाधा के काम कर सकें।
2. कानूनी प्रकृति और प्रभाव
मंत्रालय ने इस समझौते की तकनीकी बारीकियों को भी स्पष्ट किया है:
गैर-बाध्यकारी: यह MoU कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और न ही यह किसी देश के घरेलू कानूनों को बदलता है।
अनिश्चितकालीन सहयोग: यह हस्ताक्षर की तिथि से प्रभावी हो गया है और भविष्य में अनिश्चित काल तक जारी रहेगा।
संप्रभुता का सम्मान: यह किसी भी पक्ष को दूसरे देश के विनियामक ढांचे में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं देता।
3. CCIL क्या है और इसका महत्व क्यों है?
क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) भारत का मुख्य संस्थान है जो सरकारी बॉन्ड, विदेशी मुद्रा (Forex) और मनी मार्केट के लेन-देन का निपटान (Settlement) करता है।
यदि यूरोपीय संघ CCIL को मान्यता नहीं देता, तो यूरोपीय बैंकों को भारत में व्यापार करने के लिए बहुत अधिक पूंजी सुरक्षित रखनी पड़ती, जिससे उनके लिए भारत में काम करना महंगा और कठिन हो जाता।
4. प्रमुख लाभ (Key Benefits)
| लाभार्थी | मुख्य लाभ |
| यूरोपीय बैंक | भारत के सरकारी प्रतिभूति बाजार (G-Sec) में व्यापार जारी रख सकेंगे। |
| भारतीय बाजार | विदेशी निवेश (Foreign Investment) में स्थिरता बनी रहेगी। |
| बैंकिंग क्षेत्र | अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग मानकों और सहयोग में सुधार होगा। |
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