भारत की ‘बायो-इकोनॉमी’ को नई उड़ान (India’s ‘bio-economy’ gets a new lease on life)

India's 'bio-economy' gets a new lease on life
  • केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। इस पहल के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
  • BIRAC फंड का आगाज़: सरकार ने जैव प्रौद्योगिकी और संबंधित क्षेत्रों में रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन को गति देने के लिए BIRAC (अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष) की शुरुआत की है।
  • स्वदेशी विनिर्माण पर ज़ोर: इस कोष का प्राथमिक लक्ष्य ‘डीप-टेक’ नवाचारों को प्रोत्साहित करना और देश के भीतर ही उच्च-स्तरीय विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देना है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।
  • बायो-इकोनॉमी की छलांग: डॉ. सिंह ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में भारत की जैव अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व प्रगति की है। साल 2014 में जो क्षेत्र 8 अरब डॉलर का था, उसमें अब कई गुना वृद्धि देखी गई है।
  • स्टार्टअप्स का बढ़ता जाल: देश में नवाचार के प्रति बढ़ते उत्साह का प्रमाण देते हुए उन्होंने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में स्टार्टअप्स की संख्या अब 11,000 के आंकड़े को पार कर गई है।

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