
चर्चा में क्यों?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने अपना 33वां वार्षिक प्रकाशन ‘Energy Statistics India 2026’ जारी किया है, जो देश के ऊर्जा भंडार, उत्पादन और खपत का व्यापक डेटा प्रस्तुत करता है।
प्रमुख बिंदु
ऊर्जा आपूर्ति में वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (TPES) 2.95% बढ़कर 9,32,816 किलो टन तेल समकक्ष (KToE) तक पहुँच गई है।
नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता: 31 मार्च, 2025 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 47,04,043 मेगावाट आँकी गई है, जिसमें अकेले सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 71% है।
अग्रणी राज्य: देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का 70% से अधिक हिस्सा छह राज्यों— राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में केंद्रित है।
स्थापित क्षमता और उत्पादन: नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 2016 के 90,134 मेगावाट से बढ़कर 2025 में 2,29,346 मेगावाट हो गई है, जिसमें 10.93% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है।
खपत और दक्षता: प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत बढ़कर 18,096 मेगाजूल हो गई है। वहीं, तकनीकी सुधारों के कारण वितरण हानि (T&D losses) 22% से घटकर 17% रह गई है।
कोयले का दबदबा: कोयला अभी भी ऊर्जा का मुख्य स्रोत बना हुआ है, जिसकी आपूर्ति 2024-25 में बढ़कर 5,52,315 KToE हो गई है।
बढ़ता निवेश: ऊर्जा क्षेत्र में क्रेडिट फ्लो (ऋण प्रवाह) में छह गुना से अधिक की वृद्धि हुई है, जो 2021 के ₹1,688 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹10,325 करोड़ हो गया है।
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(‘ऊर्जा सांख्यिकी भारत 2026’ रिपोर्ट (‘Energy Statistics India 2026’ report))
