
चर्चा में क्यों?
लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) संशोधन विधेयक, 2025 को पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य IBC, 2016 के मौजूदा ढांचे को मजबूत करना और वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप 12 महत्वपूर्ण बदलाव लागू करना है।
प्रमुख बिंदु
मूल उद्देश्य: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, इन संशोधनों का लक्ष्य हितधारकों के लिए मूल्य को अधिकतम (Value Maximisation) करना और समाधान प्रक्रिया में शासन (Governance) में सुधार करना है।
बैंकों की रिकवरी: बैंकिंग क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए, बैंकों ने विभिन्न माध्यमों से कुल ₹1,04,099 करोड़ की वसूली की है, जिसमें से ₹54,528 करोड़ (52.3%) अकेले IBC के माध्यम से प्राप्त हुए हैं।
लघु कंपनियों के लिए नया ढांचा: मौजूदा फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के स्थान पर लेनदार-प्रवर्तित (Creditor-initiated) ढांचा पेश किया गया है, जिसमें छोटी कंपनियों के लिए समय सीमा कम रखी गई है।
महत्वपूर्ण मॉडल: विधेयक में ‘डेटर-इन-पजेशन’ (Debtor-in-possession) मॉडल और अदालत से बाहर समझौते (Out-of-court settlements) के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय और समूह दिवाला: जटिल मामलों को सुलझाने के लिए समूह दिवाला (Group Insolvency) और सीमा पार दिवाला (Cross-border Insolvency) के प्रावधान जोड़े गए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
चयन समिति की सिफारिशें: सरकार ने चयन समिति की सभी 11 सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। साथ ही, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक अतिरिक्त प्रावधान जोड़ा गया है जिसके तहत लेनदारों की समिति (CoC) को अपने निर्णयों के कारण दर्ज करने होंगे।
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