New Income Tax Rules 2026 : 1 अप्रैल से लागू हुआ नया आयकर अधिनियम

New Income Tax Rules 2026

चर्चा में क्यों?
भारत में आज यानी 1 अप्रैल 2026 से नए वित्त वर्ष (FY 2026-27) की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही देश की प्रत्यक्ष कर प्रणाली (Direct Tax System) में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए 60 साल पुराने कानून की जगह ‘आयकर अधिनियम 2025’ को लागू कर दिया गया है।

प्रमुख बिंदु:
नए आयकर अधिनियम 2025 के प्रभावी होने से अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ (FY) और ‘असेसमेंट ईयर’ (AY) की जगह केवल एक ‘टैक्स ईयर’ (Tax Year) की व्यवस्था लागू हो गई है।

ऑडिट के दायरे में नहीं आने वाले स्वरोजगार (Self-employed) और प्रोफेशनल्स के लिए आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय सीमा को बढ़ाकर अब 31 अगस्त कर दिया गया है।

शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) में वृद्धि की गई है, जिससे अब डेरिवेटिव ट्रेडिंग करना पहले के मुकाबले महंगा हो जाएगा।

मकान किराया भत्ता (HRA) के नियमों को सख्त करते हुए अब कुछ विशेष मामलों में मकान मालिक का पैन (PAN) विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया है।

बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी अब उच्च एचआरए (HRA) छूट वाले शहरों की सूची में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है।

कर्मचारियों के लिए भोजन (Meal) से जुड़े टैक्स बेनिफिट बढ़ाए गए हैं और सालाना टैक्स-फ्री गिफ्ट की सीमा में भी सरकार ने बढ़ोतरी की है।

पुराने टैक्स सिस्टम का उपयोग करने वाले करदाताओं के लिए बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली छूट की सीमा को बढ़ाया गया है।

शेयर बायबैक पर लगने वाले टैक्स को अब लाभांश (Dividend) के बजाय ‘कैपिटल गेन’ के रूप में वसूला जाएगा, जिससे निवेशकों पर सीधा असर पड़ेगा।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर टैक्स छूट का लाभ अब केवल उन्हीं बॉन्ड्स पर मिलेगा जो मूल इश्यू (Original Issue) के दौरान खरीदे गए हों।

लाभांश या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय के लिए लिए गए कर्ज के ब्याज को अब टैक्स में छूट के रूप में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।

टैक्सपेयर्स अब एक ही घोषणा पत्र जमा करके विभिन्न आय स्रोतों पर टीडीएस (TDS) कटने से बच सकते हैं, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी।

एनआरआई (NRI) से संपत्ति खरीदने पर टीडीएस काटने के लिए अब टीएएन (TAN) की आवश्यकता नहीं होगी और यह प्रक्रिया केवल पैन (PAN) से पूरी हो सकेगी।

विदेश यात्रा पर लगने वाले टीसीएस (TCS) को घटाकर अब मात्र 2 प्रतिशत कर दिया गया है और शिक्षा व इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी राहत दी गई है।

आयकर रिटर्न में सुधार (Revised Return) करने के लिए अब 31 मार्च तक का समय मिलेगा, हालांकि दिसंबर के बाद फाइलिंग पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे पर प्राप्त होने वाले ब्याज को अब पूरी तरह से कर-मुक्त (Tax-free) कर दिया गया है।

आयकर रिटर्न फॉर्म ITR-1 (सहज) में अब करदाता एक के बजाय दो मकानों से होने वाली आय को भी दर्शा सकेंगे।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):
आयकर अधिनियम 2025: यह नया कानून भारत के पुराने ‘आयकर अधिनियम 1961’ का स्थान लेगा, जिसे कर प्रणाली को सरल बनाने के लिए तैयार किया गया है।

STT (Securities Transaction Tax): यह शेयर बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री पर लगाया जाने वाला एक प्रत्यक्ष कर है।

TDS और TCS: टीडीएस (Tax Deducted at Source) आय के स्रोत पर काटा जाने वाला कर है, जबकि टीसीएस (Tax Collected at Source) विक्रेता द्वारा खरीदार से वसूला जाता है।

ITR-1 (सहज): यह फॉर्म उन व्यक्तियों के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और आय का स्रोत वेतन, एक (अब दो) गृह संपत्ति या अन्य स्रोत है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
1. नए नियमों के अनुसार अब FY और AY के स्थान पर किस शब्द का प्रयोग होगा?
अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह केवल एक ‘टैक्स ईयर’ (Tax Year) का प्रयोग किया जाएगा।

2. विदेश यात्रा के लिए नए टीसीएस (TCS) की दर क्या निर्धारित की गई है?
विदेश यात्रा पर लगने वाले टीसीएस को घटाकर अब मात्र 2 प्रतिशत (2%) कर दिया गया है।

3. क्या मोटर दुर्घटना मुआवजे (MACT) पर मिलने वाला ब्याज अब टैक्स के दायरे में आएगा?
नहीं, नए नियमों के अनुसार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे पर प्राप्त ब्याज अब पूरी तरह से कर-मुक्त है।

4. स्व-रोजगार वाले व्यक्तियों (बिना ऑडिट) के लिए ITR फाइल करने की नई समय सीमा क्या है?
ऐसे व्यक्तियों के लिए अब ITR फाइल करने की समय सीमा 31 अगस्त निर्धारित की गई है।

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(New Income Tax Rules 2026 : 1 अप्रैल से लागू हुआ नया आयकर अधिनियम)

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