Cyber Safe India: I4C और RBIH के बीच ‘म्यूल अकाउंट्स’ पर लगाम लगाने के लिए समझौता

Cyber Safe India: I4C और RBIH के बीच ‘म्यूल अकाउंट्स’ पर लगाम लगाने के लिए समझौता

चर्चा में क्यों?
​भारत को साइबर अपराधों से सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 12 मई 2026 को गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके बैंकिंग प्रणाली में छिपे ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) की पहचान करना और उन्हें खत्म करना है, जो साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का एक बड़ा जरिया बनते हैं।

​प्रमुख बिंदु:

​AI का उपयोग: इस सहयोग के माध्यम से छिपे हुए म्यूल अकाउंट्स का पता लगाने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग किया जाएगा।

​डेटा एकीकरण: I4C के ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ (Suspect Registry) के डेटा को “MuleHunter.ai” जैसे AI-आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणालियों के साथ जोड़ा जाएगा।

​खुफिया जानकारी साझा करना: दोनों संस्थाएं धोखाधड़ी-जोखिम से जुड़ी खुफिया जानकारी, विश्लेषणात्मक सहायता और परिचालन समन्वय को मजबूत करेंगी।

​बैंकिंग सुरक्षा: यह तंत्र बैंकों और वित्तीय संस्थानों को संदिग्ध खातों की तेज़ी से पहचान करने और धोखाधड़ी के पैसे को बाहर निकालने से पहले रोकने में मदद करेगा।

​डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र: इस पहल का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान ईकोसिस्टम की सुरक्षा और लचीलेपन को बढ़ाना है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):
​I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre): इसकी स्थापना जनवरी 2019 में गृह मंत्रालय (MHA) के तहत साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक व्यापक ढांचे के रूप में की गई थी।

​RBIH (Reserve Bank Innovation Hub): यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, जो वित्तीय क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देती है।

​म्यूल अकाउंट (Mule Account): यह एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा अवैध रूप से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने या लाँडर (Launder) करने के लिए किया जाता है।

​MuleHunter.ai: यह RBI द्वारा विकसित एक AI-आधारित समाधान है जो म्यूल अकाउंट्स की पहचान करने के लिए वर्तमान में 26 से अधिक बैंकों में कार्यरत है।

​FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
​1. I4C और RBIH के बीच समझौता कब हुआ?
यह समझौता 12 मई 2026 को हुआ है।

​2. ‘म्यूल अकाउंट्स’ क्या होते हैं?
म्यूल अकाउंट्स वे खाते होते हैं जिनका उपयोग अपराधी धोखाधड़ी से कमाए गए पैसों को इधर-उधर करने या छिपाने के लिए करते हैं।

​3. इस पहल में किस तकनीक का मुख्य रूप से उपयोग किया जाएगा?
इसमें मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जाएगा।

​4. ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ क्या है?
यह I4C द्वारा बनाए रखा गया एक डेटाबेस है जिसमें साइबर अपराधों में शामिल संदिग्ध व्यक्तियों और खातों की जानकारी होती है।

​5. इस समझौते का मुख्य लाभ क्या है?
इससे डिजिटल बैंकिंग में धोखाधड़ी की पहचान वास्तविक समय (Real-time) में हो सकेगी और नागरिकों का पैसा सुरक्षित रहेगा।

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