Gold Import Rules: सरकार ने ‘अग्रिम प्राधिकार योजना’ के तहत सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की सीमा तय की

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत सरकार (Government of India) ने आभूषण निर्यातकों (Jewelry Exporters) के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए ‘अग्रिम प्राधिकार योजना’ (Advance Authorization Scheme) के अंतर्गत शून्य शुल्क (Zero Duty) पर सोने के आयात (Gold Import) की अधिकतम सीमा 100 किलोग्राम तय कर दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी इस नई अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य आयात-निर्यात प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, घरेलू विनिर्माण का सटीक आकलन करना और इस योजना के संभावित दुरुपयोग को रोकना है।

प्रमुख बिंदु

विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade – DGFT) द्वारा जारी एक सार्वजनिक सूचना के अनुसार, अब कोई भी निर्यातक ‘अग्रिम प्राधिकार योजना’ (Advance Authorization Scheme) के तहत एक बार में अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही बिना किसी आयात शुल्क (Import Duty) के मंगा सकेगा। गौरतलब है कि इससे पहले इस योजना के अंतर्गत सोने के आयात की मात्रा पर कोई ऊपरी सीमा (Upper Limit) निर्धारित नहीं थी। यह योजना मुख्य रूप से आभूषण निर्यातकों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कच्चे माल (Raw Material) का शून्य सीमा शुल्क पर आयात करने की सुविधा प्रदान करती है।

नए नियमों के तहत सरकार ने अनुपालन (Compliance) और निगरानी तंत्र को और अधिक सख्त कर दिया है। पहली बार आवेदन करने वाले निर्यातकों (First-time Applicants) के लिए अब उनके विनिर्माण संयंत्रों (Manufacturing Plants) का भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम उनकी वास्तविक परिचालन स्थिति (Operational Status) और उत्पादन क्षमता (Production Capacity) का जमीनी स्तर पर सटीक आकलन करने के लिए उठाया गया है।

इसके अतिरिक्त, उन कंपनियों पर भी कड़ी शर्तें लागू की गई हैं जो इस योजना का बार-बार लाभ उठाती हैं। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी कंपनी को दोबारा शुल्क मुक्त (Duty-Free) सोने के आयात की अनुमति तभी मिलेगी, जब वह अपने पिछले निर्यात लक्ष्य (Export Target) का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा कर लेगी। पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के लिए, DGFT के क्षेत्रीय कार्यालयों (Regional Offices) को हर महीने एक विस्तृत रिपोर्ट महानिदेशालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT): यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के अधीन कार्यरत एक संलग्न निकाय है। इसकी स्थापना वर्ष 1991 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली (New Delhi) में स्थित है। इसका मुख्य कार्य भारत की विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) का निर्माण और कार्यान्वयन करना है। • अग्रिम प्राधिकार योजना (Advance Authorization Scheme): यह योजना भारत की विदेश व्यापार नीति (FTP) के तहत संचालित होती है। इसका मूल उद्देश्य निर्यात किए जाने वाले उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इनपुट (कच्चे माल) के शुल्क-मुक्त आयात (Duty-free Import) की अनुमति देना है। • मूल्यवर्धन (Value Addition): इस योजना के तहत यह अनिवार्य है कि आयातित कच्चे माल से तैयार उत्पाद का निर्यात करते समय कम से कम 15% का ‘न्यूनतम मूल्यवर्धन’ (Minimum Value Addition) किया जाए (कुछ विशिष्ट वस्तुओं के लिए यह अलग हो सकता है)। • भारत में सोने का आयात: भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता (Second-largest Consumer) है। सोने का भारी आयात भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit – CAD) और व्यापार घाटे को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख आर्थिक कारक है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

प्रश्न: ‘अग्रिम प्राधिकार योजना’ (Advance Authorization Scheme) का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर: इस योजना का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों को निर्यात उत्पादों के निर्माण के लिए शून्य सीमा शुल्क (Zero Customs Duty) पर आवश्यक कच्चे माल (जैसे सोना) के आयात की अनुमति देकर भारतीय निर्यात को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है।

प्रश्न: DGFT के नए नियमों के अनुसार सोने के आयात की नई सीमा क्या निर्धारित की गई है? उत्तर: नए नियमों के तहत आभूषण निर्यातक इस योजना के माध्यम से एक बार में अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही शुल्क-मुक्त आयात कर सकते हैं।

प्रश्न: दोबारा बिना शुल्क सोने के आयात के लिए निर्यातकों को कौन सी शर्त पूरी करनी होगी? उत्तर: किसी भी निर्यातक कंपनी को दोबारा शुल्क मुक्त सोने के आयात की अनुमति तभी मिलेगी जब वह अपने पिछले निर्धारित निर्यात लक्ष्य (Export Target) का कम से कम 50 प्रतिशत पूरा कर लेगी।

प्रश्न: पहली बार आवेदन करने वाले निर्यातकों (First-time Applicants) के लिए क्या नया नियम लागू किया गया है? उत्तर: पहली बार योजना का लाभ लेने वाले निर्यातकों के लिए उनके विनिर्माण संयंत्रों (Manufacturing Plants) की वास्तविक क्षमता और परिचालन स्थिति जांचने हेतु ‘भौतिक निरीक्षण’ (Physical Inspection) अनिवार्य कर दिया गया है।

प्रश्न: विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) किस केंद्रीय मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है? उत्तर: विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के अधीन कार्य करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *