
चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम की राजधानी हनोई में अपने समकक्ष जनरल फान वान गियांग के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को एक नए आयाम तक ले जाना है।
प्रमुख बिंदु:
दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नेविगेशन की स्वतंत्रता पर जोर दिया, जो दक्षिण चीन सागर के वर्तमान संदर्भ में काफी अहम है।
भारत ने वियतनाम के सशस्त्र बलों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के लिए अपना पूर्ण समर्थन दोहराया है।
रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और संयुक्त रक्षा उत्पादन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।
भारत और वियतनाम के बीच सैन्य-से-सैन्य आदान-प्रदान और संयुक्त युद्धाभ्यास को आने वाले समय में और विस्तारित किया जाएगा।
इस यात्रा के दौरान, भारत ने वियतनाम को रक्षा खरीद के लिए दी गई ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (LoC) के प्रभावी और तेजी से उपयोग पर भी चर्चा की।
दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, सूचना साझाकरण और आतंकवाद विरोधी अभियानों के क्षेत्र में मिलकर काम करने का संकल्प लिया है।
यह बैठक भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) और दोनों देशों की मजबूत होती ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):
वियतनाम की राजधानी: हनोई (Hanoi)।
वियतनाम की मुद्रा: वियतनामी डोंग (VND)।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी: भारत और वियतनाम ने वर्ष 2016 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को इस सर्वोच्च स्तर पर उन्नत (Upgrade) किया था।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी: भारत सरकार की इस नीति (शुरुआत 2014) का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
1. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में किस देश की यात्रा की है?
उन्होंने हाल ही में अहम रक्षा वार्ता के लिए वियतनाम (राजधानी हनोई) की यात्रा की है।
2. वियतनाम के वर्तमान रक्षा मंत्री कौन हैं?
वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग हैं।
3. इस द्विपक्षीय बैठक का मुख्य फोकस क्या था?
इस बैठक का मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति व स्थिरता लाना था।
