
चर्चा में क्यों?
20 जुलाई 2026 को भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के महानिदेशक को मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते (AFS) के लिए अपनी स्वीकृति का साधन (Instrument of Acceptance) औपचारिक रूप से सौंप दिया है, जिससे भारत आधिकारिक तौर पर इस समझौते का पक्ष बन गया है।
प्रमुख बिंदु:
* भारत सरकार के वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल द्वारा जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के महानिदेशक को यह औपचारिक स्वीकृति पत्र सौंपा गया।
* इस स्वीकृति के साथ ही भारत विश्व व्यापार संगठन के इस समझौते को स्वीकार करने वाला 123वां सदस्य देश बन गया है।
* यह समझौता पर्यावरण स्थिरता के उद्देश्य वाला पहला बहुपक्षीय WTO समझौता है, जिसे जून 2022 में जिनेवा में 12वें WTO मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC12) में अपनाया गया था।
* विश्व व्यापार संगठन के दो-तिहाई सदस्यों की स्वीकृति के बाद यह बहुपक्षीय समझौता 15 सितंबर 2025 को आधिकारिक रूप से लागू हो गया था।
* यह समझौता केवल समुद्री मत्स्य पालन और समुद्र में मछली पकड़ने से संबंधित गतिविधियों पर लागू होता है।
* जलीय कृषि (Aquaculture) और अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland fisheries) को इस समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
* यह समझौता अवैध, अनरिपोर्टेड और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने तथा समुद्री जीवों के अत्यधिक दोहन को बढ़ावा देने वाली सरकारी सब्सिडी पर रोक लगाता है।
* यह पहल उन हानिकारक सब्सिडी को नियंत्रित करती है जो दूरस्थ जल में बड़े औद्योगिक मछली पकड़ने वाले बेड़ों का समर्थन करती हैं, जिससे भारत के छोटे और पारंपरिक मछुआरों को फायदा होगा।
* भारत का अधिकांश झींगा निर्यात जलीय कृषि पर आधारित है, इसलिए इस समझौते के दायरे से बाहर होने के कारण भारत के समुद्री खाद्य निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता सुरक्षित रहेगी।
* समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भारत ने ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) नियम, 2025’ और ‘हाई सीज़ में भारतीय झंडे वाले जहाजों के लिए दिशानिर्देश, 2025’ के माध्यम से अपना प्रबंधन ढांचा मजबूत किया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Static GK):
* विश्व व्यापार संगठन (WTO): इसकी स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।
* AFS का पूरा नाम: Agreement on Fisheries Subsidies (मत्स्य पालन सब्सिडी पर समझौता)।
* IUU मत्स्य पालन: Illegal, Unreported, and Unregulated fishing (अवैध, गैर-रिपोर्टेड और अनियमित मत्स्य पालन), जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
* PMMSY (प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना): यह भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य देश में मत्स्य पालन क्षेत्र का सतत, जिम्मेदार और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
प्रश्न 1. भारत WTO के मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते (AFS) को स्वीकार करने वाला कौन सा सदस्य देश बन गया है?
उत्तर: भारत इस समझौते को स्वीकार करने वाला 123वां सदस्य देश बन गया है।
प्रश्न 2. क्या मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता (AFS) जलीय कृषि (Aquaculture) पर लागू होता है?
उत्तर: नहीं, जलीय कृषि (Aquaculture) और अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland fisheries) इस समझौते के दायरे से बाहर हैं।
प्रश्न 3. इस समझौते को पहली बार किस WTO मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में अपनाया गया था?
उत्तर: इसे जून 2022 में जिनेवा में आयोजित 12वें WTO मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC12) में अपनाया गया था।
प्रश्न 4. विश्व व्यापार संगठन (WTO) का यह मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता कब लागू हुआ था?
उत्तर: दो-तिहाई सदस्यों की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद यह समझौता 15 सितंबर 2025 को लागू हुआ था।
प्रश्न 5. अवैध मत्स्य पालन से निपटने के लिए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य अवैध, अनरिपोर्टेड और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने को बढ़ावा देने वाली सरकारी सब्सिडी को रोकना है ताकि समुद्री संसाधनों और पारंपरिक मछुआरों के हितों की रक्षा की जा सके।
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